Monday,07 September 2026,11:30 AM
ब्रेकिंग न्यूज़
सागर में जहरीली शराब पीने से अब तक 10 की मौत, उपमुख्यमंत्री बोले- 'कई दुकानें की गईं सील'भारतीय नौसेना और रॉयल थाई नेवी के बीच स्टाफ वार्ता का नई दिल्ली में सफल आयोजन, रक्षा एवं समुद्री सहयोग पर हुई चर्चानेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या 1,300 के पारयूएस ओपन: नवारो, टाउनसेंड, पेगुला, नोस्कोवा चौथे राउंड मेंएएचएफ जूनियर एशिया कप: भारतीय टीम ने इंडोनेशिया को 14-0 से हरायाखेल और शिक्षा जीवन बदल सकती है, ब्राजील फुटबॉल लीजेंड काफू ने युवा लड़कियों को दी सलाहयूएस ओपन: नवारो, टाउनसेंड, पेगुला, नोस्कोवा चौथे राउंड मेंयूएस ओपन: बेन शेल्टन ने शापोवालोव को और टियाफो ने वचेरोट को हराकर चौथे राउंड में जगह बनाई
नेशनल
आईआईटी खड़गपुर : पहले ही प्रयास में अमेरिका की एयरोनॉटिक्स प्रतियोगिता में एशिया में पांचवें स्थान पर
By Virat baibhav | Publish Date: 2/9/2026 5:18:21 PM
आईआईटी खड़गपुर : पहले ही प्रयास में अमेरिका की एयरोनॉटिक्स प्रतियोगिता में एशिया में पांचवें स्थान पर

 
 
कोलकाता। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) खड़गपुर ने विचिटा, कंसास में अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स (एआईएए) द्वारा आयोजित 'डिजाइन/बिल्ड/फ्लाई' प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में आईआईटी खड़गपुर की यह पहली भागीदारी थी। 12 देशों की 98 यूनिवर्सिटी टीमों, 1,179 स्टूडेंट्स और प्रतिभागियों के बीच मुकाबला करते हुए आईआईटी खड़गपुर की टीम ने अपनी पहली ही कोशिश में शानदार प्रदर्शन किया। इसे दुनिया भर में 39वीं और एशिया में 5वीं रैंक मिली, और सभी भारतीय टीमों में सबसे ज्यादा कुल स्कोर हासिल किया।
सिर्फ चार महीनों में, आईआईटी खड़गपुर की 21 सदस्यों वाली स्टूडेंट टीम ने एक पूरा एयरक्राफ्ट डिजाइन किया, बनाया, टेस्ट किया और सफलतापूर्वक उड़ाया। इस तरह उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग को कैंपस से ग्लोबल स्टेज तक पहुंचाया।"एयरोडायनामिक्स, स्ट्रक्चर और प्रोपल्शन से लेकर एवियोनिक्स, सीएडी, मैन्युफैक्चरिंग और फ्लाइट वैलिडेशन तक, स्टूडेंट्स ने मुश्किल समय-सीमा के अंदर कॉन्सेप्ट्स को फ्लाइट के लिए तैयार एयरक्राफ्ट में बदल दिया, जिससे हैंड्स-ऑन इंजीनियरिंग, टीमवर्क और इनोवेशन की ताकत का पता चला।
 
इंस्टीट्यूट ने कहा कि यह कामयाबी एयरोस्पेस इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और एरियल रोबोटिक्स खड़गपुर (एआरके) लैब के मजबूत सपोर्ट और प्रोफेसर अर्नब रॉय, अनूप घोष, नाबा कुमार पेयाडा, प्रोफेसर संदीप साहा और प्रोफेसर सोमेश कुमार की मेंटरशिप की वजह से मुमकिन हो पाई।"यह सिर्फ एक रैंकिंग नहीं है बल्कि दुनिया के सबसे मुश्किल स्टूडेंट एयरक्राफ्ट डिजाइन कॉम्पिटिशन में आईआईटी खड़गपुर की पहली छाप है। साथ ही एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में अनुभव-आधारित लर्निंग, इनोवेशन और बेहतरीन काम करने के कल्चर को मज़बूत करने की दिशा में एक और कदम है।यह कॉम्पिटिशन का 30वां साल था। जमा किए गए और परखे गए 175 प्रपोजल में से, 102 टीमों को कॉम्पिटिशन के अगले चरण के लिए डिजाइन रिपोर्ट जमा करने के लिए बुलाया गया। कुल 98 टीमों ने डिजाइन रिपोर्ट जमा कीं और 89 टीमें फ्लाई-ऑफ (17 इंटरनेशनल टीमें) में शामिल हुईं।
 
1200 से ज्यादा स्टूडेंट्स, फैकल्टी और मेहमान मौजूद थे। शामिल हुई 89 टीमों में से 83 ने टेक इंस्पेक्शन पूरा किया। 197 ऑफिशियल फ्लाइट कोशिशों में से 143 सफल रहीं, जिनमें 73 टीमों ने कम से कम एक सफल फ्लाइट स्कोर हासिल किया और 17 टीमों ने सभी मिशन (एक ग्राउंड और तीन फ़्लाइट मिशन) पूरे किए।एआईएए ने कहा कि टीमों की क्वालिटी, कॉम्पिटिशन के लिए उनकी तैयारी और फ्लाइट का संचालन बहुत शानदार था।इस साल के कॉम्पिटिशन का थीम 'बैनर टोइंग बुश प्लेन' था। पहला मिशन एक टेस्ट फ्लाइट थी, जिसमें एयरक्राफ्ट को पांच मिनट के अंदर तीन चक्कर पूरे करने थे। दूसरा मिशन एक चार्टर फ्लाइट थी, जिसमें स्कोर इस आधार पर तय किया गया कि कितने यात्री (रबर डक) और कार्गो (हॉकी पक) ले जाए गए, साथ ही कितने चक्कर लगाए गए और बैटरी की क्षमता क्या थी।
 
आखिरी मिशन बैनर खींचने वाली फ्लाइट थी, जिसमें स्कोर बैनर की लंबाई, लगाए गए चक्करों की संख्या और आरएसी (विंगस्पैन) पर निर्भर करता था।टीमों को एक जमीनी मिशन भी पूरा करना था, जिसमें यात्रियों को चढ़ाने और उतारने की क्षमता दिखानी थी और फिर हवाई जहाज को बैनर खींचने वाले कॉन्फिगरेशन में बदलना था। पहला स्थान यूनिवर्सिटी ऑफ ल्युब्लियाना को मिला, जबकि यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन-सिएटल पहले रनर-अप रही। तीसरा स्थान यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स को मिला।
 
COPYRIGHT @ 2016 VIRAT VAIBHAV. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS