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बच्चों के बढ़ते अपहरण पर सख्त कानून की मांग, सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल
By Virat baibhav | Publish Date: 2/9/2026 5:12:17 PM
बच्चों के बढ़ते अपहरण पर सख्त कानून की मांग, सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल

नई दिल्ली। देश में बच्चों के बढ़ते अपहरण के मामलों को लेकर कानून सख्त करने की मांग वाली एक जनहित याचिका बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। यह याचिका वकील अश्विनी उपाध्याय ने दाखिल की है।

याचिका में कहा गया है कि देश में गैर-कानूनी गोद लेने का संगठित रैकेट चल रहा है। अंतरराज्यीय चाइल्ड ट्रैफिकिंग नेटवर्क सक्रिय है। शोषण और अंगों की ट्रेडिंग के लिए बच्चों को किडनैप किया जा रहा है। मेडिकल ट्रायल के लिए बड़े पैमाने पर बच्चों की किडनैपिंग होती है। जबकि पुलिस लापता, किडनैप हुए और अगवा किए गए बच्चों के मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं करती और तेजी से जांच भी नहीं करती। देर से जांच और लंबे ट्रायल से संगठित किडनैपिंग माफिया को अपना गैर-कानूनी धंधा फलने-फूलने में मदद मिलती है।

याचिका में कई अहम मांगें रखी गई हैं। मांग की गई है कि बच्चों के अपहरण की जांच पुलिस के एसीपी या एसएचओ स्तर के अधिकारी करें।साथ ही अपहरण के मामलों को 1 साल के भीतर निपटाने के लिए एमएलए-एमपी कोर्ट की तर्ज पर स्पेशल कोर्ट का गठन किया जाए। इसके अलावा अपहरणकर्ताओं के परिवार के सदस्यों की संपत्ति जब्त करने की भी मांग की गई है।याचिका में चौंकाने वाले आंकड़े भी दिए गए हैं। कहा गया है कि 1 जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक साल 2013 से बिहार में हर साल लगभग 15,000 मिसिंग केस रजिस्टर होते हैं, जिनमें से अधिकतर बच्चे होते हैं और मुश्किल से 50 प्रतिशत बच्चे ही मिल पाते हैं।

एनसीआरबी के डेटा का हवाला देते हुए बताया गया है कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग के सबसे ज्यादा केस ओडिशा, बिहार, तेलंगाना और महाराष्ट्र में रजिस्टर हुए हैं। नाबालिग लड़कों की ट्रैफिकिंग के सबसे ज्यादा केस ओडिशा में हैं, उसके बाद बिहार का नंबर आता है।नाबालिग लड़कियों की ट्रैफिकिंग में राजस्थान में सबसे ज्यादा केस रजिस्टर हुए हैं। इन बच्चों को भीख मांगने, बाल मजदूरी, वेश्यावृत्ति और दूसरे गैर-कानूनी कामों में मजबूर किया जाता है।

याचिका में एक हालिया मामले का भी जिक्र है। कहा गया है कि 5 जून 2026 को दिल्ली पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक यह नेटवर्क 5 राज्यों (दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात) में काम कर रहा था। यह गिरोह ईडब्ल्यूएस और बीपीएल परिवारों से नवजात बच्चों को किडनैप करके उन्हें गैर-कानूनी कामों के लिए 8 से 10 लाख रुपए में बेच रहा था।

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