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दिल्ली में होगा सिनेमैटोग्राफ लाइसेंसिंग में बड़ा सुधार
By Virat baibhav | Publish Date: 17/8/2026 7:02:59 PM
नई दिल्ली। देश की राजधानी में सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स के सिनेमैटोग्राफ लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और निरीक्षण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अधिसूचित की है। नई व्यवस्था के अंतर्गत वर्षों से चली आ रही अलग-अलग विभागों से एनओसी लेने की प्रक्रिया को समाप्त करते हुए एकीकृत सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य लाइसेंसिंग प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की समस्या को दूर करते हुए आवेदकों को एक स्पष्ट, जवाबदेह और तकनीक आधारित व्यवस्था उपलब्ध कराना है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी व समयबद्ध बनाने के लिए दो विशेष समितियों का गठन किया गया है। नई एसओपी वर्ष 2015 में फाइनल हो गई थी, लेकिन पूर्व सरकार ने इसे लागू नहीं किया था। नई एसओपी के अंतर्गत पहली समिति जिला लाइसेंसिंग समिति (डीएलसी) का गठन किया गया है। राजस्व विभाग के जिला प्रशासन के अधीन गठित डीएलसी लाइसेंसिंग संबंधी अंतिम निर्णय लेगी। इसका अध्यक्ष डिप्टी कमिश्नर (रेवेन्यू)/डीएम होगा। समिति में पुलिस, फायर विभाग, नगर निगम/डीडीए के इंजीनियरिंग विंग, दिल्ली जल बोर्ड और जिला मेडिकल अधिकारी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। नई एसओपी इस विषय से संबंधित दिल्ली पुलिस के पूर्व स्टैंडिंग ऑर्डर्स का स्थान लेगी। पुरानी व्यवस्था में सिनेमैटोग्राफ लाइसेंस के लिए पुलिस, फायर विभाग, नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, बिजली वितरण कंपनियों और स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों से अलग-अलग एनओसी लेने पड़ते थे। नई व्यवस्था में इस बहु-विभागीय और क्रमिक प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। यही समिति निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंसिंग संबंधी अंतिम निर्णय लेगी।
निरीक्षण की जिम्मेदारी डीआईसी संभालेगी
नई एसओपी के तहत दूसरी समिति जिला निरीक्षण समिति (डीआईसी) का गठन किया गया है। अब इसी समिति द्वारा प्रत्येक सिनेमाघर का निरीक्षण संयुक्त रूप से किया जाएगा। समिति में संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। समिति द्वारा एकीकृत, ई-साइन की गई और जियोटैग्ड सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। इससे अलग-अलग एनओसी के स्थान पर एकीकृत सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध होगी। डीआईसी का नेतृत्व एसडीएम करेंगे। इसमें प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी भी निर्धारित होगी। इससे लाइसेंसिंग का निर्णय एक स्पष्ट संस्थागत व्यवस्था के तहत होगा, जबकि पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की तकनीकी एवं सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां भी बनी रहेंगी।