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पीडब्ल्यूडी की टेंडर प्रक्रिया में किया गया बदलाव
By Virat baibhav | Publish Date: 30/7/2025 8:34:47 PM
पीडब्ल्यूडी की टेंडर प्रक्रिया में किया गया बदलाव

नई दिल्ली। दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने अपनी टेंडर प्रक्रिया में बदलाव करते हुए काम में पारदर्शिता और तय समय सीमा में बेहतर काम की शर्त रखी है। पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के नेतृत्व में विभाग ने अब टेंडर प्रक्रिया में सख्ती लाने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की है, जिससे गैर-गंभीर व सट्टेबाज़ी करने वाले ठेकेदारों पर रोक लगाई जा सके। पिछले कुछ महीनों में विभाग ने यह पाया कि कुछ ठेकेदार मात्र टेंडर हासिल करने की नीयत से असामान्य रूप से कम दरें कोट करते हैं। ये दरें विभाग द्वारा तय की गई अनुमानित लागत से बहुत नीचे होती हैं। ऐसी बोली कागज़ों पर भले ही प्रतिस्पर्धी दिखे, लेकिन व्यवहार में ये परियोजनाओं में देरी, घटिया निर्माण कार्य या कई बार परियोजना के बीच में ही परित्याग का कारण बनती हैं। इससे न सिर्फ आम जनता को असुविधा होती है बल्कि सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इन्हीं समस्याओं पर लगाम लगाने के लिए मंत्री ने सभी आगामी टेंडरों में एक एडिशनल परफॉर्मेंस गारंटी (एपीजी) की अनिवार्यता लागू करने का निर्णय लिया है, जो असामान्य रूप से कम बोली लगाने वालों पर लागू होगा। इस प्रक्रिया के बारे में मंत्री का कहना है कि यह निर्णय सिर्फ आर्थिक सुरक्षा के लिए नहीं है, बल्कि यह जवाबदेही और जनधन के प्रति सम्मान का प्रतीक है। जब कोई ठेकेदार अव्यवहारिक रूप से कम राशि पर टेंडर लेता है और फिर काम अधूरा छोड़ देता है या घटिया गुणवत्ता का काम करता है, तो नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है। हमारा लक्ष्य यह है कि जनता का एक-एक रुपया ठोस, समय पर और गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक कार्यों में बदले। हम एक ऐसा पारदर्शी और उत्तरदायी पीडब्ल्यूडी बना रहे हैं जो नागरिकों को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि यह कदम दिल्ली में सडक़ों, फ्लाईओवरों, सार्वजनिक भवनों और अन्य उच्च-मूल्य वाली परियोजनाओं के टेंडरिंग के तरीके में बड़ा बदलाव लाएगा। इससे सुनिश्चित होगा कि केवल वही ठेकेदार बोली लगाएं जो तकनीकी और वित्तीय रूप से सक्षम हों और अपने कोट किए गए रेट पर गुणवत्तापूर्ण काम करने की क्षमता रखते हों। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इस प्रावधान को सभी भविष्य के टेंडरों में शामिल करें। साथ ही, इस नई प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अभियंताओं और टेंडर मूल्यांकन समितियों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
नई व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं
एडिशनल परफॉर्मेंस गारंटी 
ऐसे सभी टेंडर जिनमें सबसे कम बोली तय अनुमानित लागत से एक निश्चित प्रतिशत से अधिक नीचे होगी, उन्हें अकार्यनीय बोली माना जाएगा। ऐसे ठेकेदारों को अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी देनी होगी, जो उस अंतर के बराबर होगी जितना प्रतिशत उन्होंने निर्धारित सीमा से नीचे बोली लगाई है। यह गारंटी, पहले से लागू सिक्योरिटी डिपॉज़िट और परफॉर्मेंस गारंटी के अतिरिक्त होगी।
सशर्त कार्य आवंटन
ऐसे बोलीदाताओं को तब तक कार्य आवंटित नहीं किया जाएगा जब तक वे निर्धारित समयसीमा के भीतर एपीजी जमा नहीं कर देते। समयसीमा का पालन न करने पर कार्य आदेश रद्द कर दिया जाएगा और विभागीय नियमों के तहत ठेकेदार को डिबार किया जा सकता है।
उद्देश्य
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सट्टा आधारित बोली प्रक्रिया पर रोक लगाना, केवल सक्षम और गंभीर ठेकेदारों को कार्य में भाग लेने के लिए प्रेरित करना और सार्वजनिक कार्यों की गुणवत्ता व समयसीमा सुनिश्चित करना है।
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