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सीबीएसई की डिजिटल कॉपी जांच व्यवस्था से छात्रों को हो रही परेशानियों पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
By Virat baibhav | Publish Date: 15/7/2026 3:30:22 PM
सीबीएसई की डिजिटल कॉपी जांच व्यवस्था से छात्रों को हो रही परेशानियों पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

 
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की डिजिटल कॉपी जांच की व्यवस्था (ओएसएम) को लेकर हो रही छात्रों की परेशानियों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस सिस्टम में छात्रों को लगातार दिक्कत आ रही है। छात्रों में काफी निराशा और हताशा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। 
 
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में सहयोग करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को इस मामले को विरोध के रूप में नहीं लेना चाहिए। कोर्ट चाहता है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि याचिका में जिन छात्रों के मार्कशीट से जुड़े व्यक्तिगत मामलों का जिक्र था, उनमें से ज्यादातर का समाधान कर दिया गया है।
 
सरकार कॉपी जांच की खामियों को गंभीरता से ले रही है। इसके लिए एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जो पूरी व्यवस्था की समीक्षा करेगी और सुधार के लिए सुझाव देगी। कोर्ट ने इस पर सरकार से स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। अब मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
 
राकेश बिंजोला की ओर से दायर याचिका में सीबीएसई की कॉपी जांच के लिए पारदर्शी और स्पष्ट नियम बनाए जाने की मांग की गई है। याचिका में मांग की गई है कि इन नियमों की निगरानी के लिए एक हाई-पावर कमेटी बनाई जाए। जिन छात्रों ने यूनिवर्सिटी या कॉलेज में प्रवेश परीक्षा पास कर ली है या प्रोविजनल एडमिशन ले लिया है, उन्हें बोर्ड के न्यूनतम अंकों की शर्त से छूट मिलनी चाहिए।
 
इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीबीएसई की संशोधित तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को नोटिस जारी किया। अदालत ने सभी पक्षों से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई की और इसके साथ ही 29 जुलाई को विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कियाा।
 
 
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