Friday,17 July 2026,07:58 PM
ब्रेकिंग न्यूज़
ट्रंप प्रशासन ने सख्‍त क‍िए वीजा नियम, अब अधिकतम चार वर्ष तक ही रह सकेंगे छात्रअमेरिका के राज्यों को निशाना बनाकर जासूसी और साइबर ऑपरेशन बढ़ा रहा है चीन, अमेरिकी सीनेटरों ने दी चेतावनीट्रंप प्रशासन की चेतावनी, अमेरिका में चुनावी डेटा पर साइबर हमले का खतरायूरी आर. फेडकिव मुंबई में नए अमेरिकी कॉन्सल जनरल बनेअमेरिकी चुनाव को लेकर ट्रंप के बयान ने बढ़ाई हलचल, कमला हैरिस बोलीं-सच्चाई से ध्यान हटाना चाहते हैं राष्ट्रपतिभारतीय नौसेना को मिला एक और एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टर, अमेरिकी राजदूत गोर बोले- रक्षा साझेदारी हुई और मजबूतपाकिस्तान: बीएलए का दावा, हमले में 45 से अधिक पाक सैनिकों को मार गिरायापाकिस्तान: सिंध के शिक्षा विभाग के दफ्तरों में बिजली कटौती से कामकाज ठप, ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित
हेल्थ
वायु प्रदूषण से याददाश्त होती है कमजोर, 10 साल की उम्र बढ़ने जितना नुकसान: स्टडी में खुलासा
By Virat baibhav | Publish Date: 8/6/2026 2:36:35 PM
वायु प्रदूषण से याददाश्त होती है कमजोर, 10 साल की उम्र बढ़ने जितना नुकसान: स्टडी में खुलासा

नई दिल्ली। वायु प्रदूषण का असर हमारे दिल पर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी पड़ता है। ऐसा कि याददाश्त कमजोर हो सकती है और सोचने-समझने की क्षमता भी घट जाती है। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से इंसान की याददाश्त और कॉग्निटिव क्षमताओं पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका असर लगभग 10 वर्ष की प्राकृतिक उम्र बढ़ने के बराबर हो सकता है। यह अध्ययन अमेरिकी संस्थानों यूसी डेविस हेल्थ और कैसर परमानेंटे के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। इसमें सूक्ष्म कणों (फाइन पार्टिकुलेट मैटर) के लंबे समय तक संपर्क का मस्तिष्क स्वास्थ्य पर प्रभाव जांचा गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि जंगल की आग, जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली संयंत्रों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) डेटा सेंटरों और अधिक ईंधन खपत करने वाले वाहनों से उत्पन्न प्रदूषण वायु गुणवत्ता को लगातार खराब कर रहा है। अध्ययन के अनुसार, ये प्रदूषक केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। अध्ययन में पाया गया कि लगभग 20 वर्षों तक अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में रहने वाले लोगों की स्मरण शक्ति अपेक्षाकृत कमजोर थी। प्रतिभागियों की तथ्यों, शब्दों और सामान्य जानकारी को याद रखने की क्षमता का परीक्षण किया गया। परिणामों में सामने आया कि अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अंक स्वच्छ वातावरण में रहने वालों की तुलना में लगातार कम रहे। शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रदूषण का सबसे अधिक असर "सिमेंटिक मेमोरी" पर देखा गया। यह वह क्षमता है जिसके माध्यम से व्यक्ति शब्दों, उनके अर्थ, अवधारणाओं और सामान्य ज्ञान को याद रखता है तथा दैनिक जीवन में उनका उपयोग करता है। अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका और यूसी डेविस के सार्वजनिक स्वास्थ्य विज्ञान विभाग की प्रोफेसर कैथरीन कॉनलोन ने कहा कि सिमेंटिक मेमोरी प्रभावी संवाद, भाषा की समझ, सूचना के प्रसंस्करण और रोजमर्रा के कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं के बीच संबंधों को लेकर बढ़ते वैज्ञानिक प्रमाणों को और मजबूत करता है। उन्होंने वायु गुणवत्ता में सुधार और हानिकारक प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य की भी रक्षा की जा सके।
 
COPYRIGHT @ 2016 VIRAT VAIBHAV. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS