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लंबे समय तक बैठने से होने वाली समस्याओं में कारगर है ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन, जानिए इसके फायदे
By Virat baibhav | Publish Date: 11/8/2026 3:02:08 PM
लंबे समय तक बैठने से होने वाली समस्याओं में कारगर है ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन, जानिए इसके फायदे

नई दिल्ली। लंबे समय तक बैठे रहने, कंधा जकड़े रहने और पैरों में खिंचाव आम हो गया है। ऐसे में योग सिर्फ शरीर को मोड़ने का नाम नहीं है, बल्कि खुद से जुड़ने का एक जरिया है। ऐसे ही योग पद्धति में ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन सबसे शरीर की जकड़न खोलने, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने समेत कई शारीरिक स्वास्थ संबंधित समस्याओं का समाधान है। ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन तीन शब्दों से मिलकर बना है, ऊर्ध्व मुख का अर्थ है ऊपर की तरफ चेहरा, पश्चिम का अर्थ होता है शरीर का पिछला हिस्सा, उत्तान का अर्थ होता है, गहरा खिंचाव और आसन की अर्थ मुद्रा। इस आसन को अंग्रेजी में अपवर्ड फेसिंग इंटेंस वेस्ट स्ट्रेच कहते हैं। इस आसन में आप उभय पादांगुष्ठासन की तरह पैर के अंगूठों को पकड़कर बैलेंस बनाते हैं और साथ ही धड़ को आगे की तरफ पैरों की ओर झुकाते हैं। यह आसन अष्टांग योग की प्राथमिक शृंखला में आता है और उभय पादांगुष्ठासन के बाद का अगला लेवल माना जाता है। योग परंपरा में ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन एक उन्नत आसन है, जो पश्चिमोत्तानासन और संतुलन का मिला-जुला रूप है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इस आसन को लेकर प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, ऊर्ध्व मुख पश्चिमोत्तानासन एक उन्नत योगासन है, जिसमें शरीर का संतुलन कूल्हों (सिट बोन्स) पर रखा जाता है और दोनों पैरों को ऊपर आकाश की ओर सीधा खींचकर हाथों से पंजों को पकड़ा जाता है। यह अभ्यास कोर शक्ति, रीढ़ के लचीलेपन और संतुलन को सुधारता है। यह एक ऐसा योग आसन है जिसमें बैठकर पैर सीधे रखते हुए आगे झुकते हैं और अंगूठे पकड़कर रीढ़ और पैरों के पिछले हिस्से को गहराई से स्ट्रेच करते हैं। इस आसन के नियमित अभ्यास करने से हैमस्ट्रिंग यानी जांघ के पीछे की मांसपेशियां, पैसिव तरीके से लंबी और लचीली होती हैं। यह एकमात्र ऐसा योग आसन है जो शरीर के पीछे वाले हिस्से का लचीलापन और आगे वाले हिस्से की ताकत दोनों को एक साथ बढ़ाता है, ताकि वह लचीलापन सिर्फ बैठे-बैठे न रहे, बल्कि काम करते समय भी टिके रहे।
 
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