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शरीर के टॉक्सिन बाहर निकालता है कपालभाति, बढ़ती है एकाग्रता
By Virat baibhav | Publish Date: 12/8/2026 3:10:05 PM
शरीर के टॉक्सिन बाहर निकालता है कपालभाति, बढ़ती है एकाग्रता

नई दिल्ली। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा, कब्ज, साइनस, अस्थमा और तनाव आम हो गया है। दवाओं के साथ-साथ अगर आप 10 मिनट कपालभाति करेंगे, तो कुछ शारीरिक समस्याओं से निजात पाने में मदद हो सकती है।  शास्त्रों में कपालभाति को 'षट्कर्म' और 'प्राणायाम' दोनों का हिस्सा माना गया है। माना जाता है कि कपालभाति से न सिर्फ शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, बल्कि नकारात्मक सोच भी दूर होती है और एकाग्रता बढ़ती है। यह एक ऐसी आसान, लेकिन बहुत असरदार योग क्रिया है, जिसको करने के दौरान तेजी से सांस छोड़नी होती है और सांस अपने आप अंदर आती है। रोजाना कुछ मिनट करने से ही शरीर और मन दोनों को फायदा मिलता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह पाचन क्रिया को मजबूत करता है। इससे पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जिससे आंतों में रक्त संचार बढ़ता है और पाचन एंजाइम बेहतर होते हैं। इससे गैस, कब्ज, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। नियमित अभ्यास से भूख बेहतर लगती है और शरीर में विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं। कपालभाति केवल पेट की सफाई नहीं करता, यह मानसिक शांति और याददाश्त को भी तेज करता है। जब हम जोर से श्वास छोड़ते हैं, तो फेफड़े साफ होते हैं और मस्तिष्क को ऑक्सीजन मिलती है। इससे याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता में वृद्धि होती है। यह तनाव, चिंता और बेचैनी को कम करता है, जिससे मन स्थिर और शांत होता है। इनके अलावा, यह रोग प्रतिरोधक क्षमता का रक्षक भी है। कपालभाति शरीर में मौजूद सभी विषैले तत्वों को बाहर निकालता है और रक्त संचार को बेहतर बनाता है। इसके चलते एंटीबॉडी का निर्माण तेज होता है और शरीर की बीमारियों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है। यह वायरल संक्रमण, फ्लू, सर्दी-खांसी जैसी आम बीमारियों से बचाव में मदद करता है। उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के मरीज इसे न करें। गर्भवती महिलाओं और मासिक धर्म के दौरान इसे करना मना है। हर्निया या पेट की गंभीर सर्जरी वाले लोग विशेषज्ञ की सलाह के बिना न करें।
 
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