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पाकिस्तान: कराची के सरकारी अस्पताल फैला रहे एचआईवी, 6 मासूमों की मौत और 120 नए मामले आए सामने
By Virat baibhav | Publish Date: 15/7/2026 3:00:48 PM
पाकिस्तान: कराची के सरकारी अस्पताल फैला रहे एचआईवी, 6 मासूमों की मौत और 120 नए मामले आए सामने

कराची। पाकिस्तान के कराची स्थित दो सरकारी अस्पतालों ने कई मासूमों को जानलेवा एचआईवी-पॉजिटिव के जाल में फंसा दिया। स्वास्थ्य महकमे के ढुलमुल रवैये ने एक-एक करके 120 को संक्रमित कर दिया। अब तक 6 बच्चे जान गंवा चुके हैं और इसकी पुष्टि प्रांतीय सरकार ने की है। सिंध कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा संस्था (एसईएसएसआई) की ओर से चलाए जाने वाले वालिका अस्पताल में एचआईवी संक्रमण के प्रकोप के बाद, अक्टूबर 2025 से अब तक अस्पताल के आसपास रहने वाले 10,500 से अधिक लोगों की एचआईवी जांच की गई है, जिनमें से 120 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। मंगलवार को कराची में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंध के श्रम मंत्री सईद गनी ने बताया कि एसईएसएसआई के ही लांधी स्थित एक अन्य अस्पताल में भी अलग से स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया, जहां 2,000 लोगों की जांच की गई और उनमें से 10 लोग एचआईवी संक्रमित पाए गए। इंडस अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. अब्दुल बारी और आगा खान यूनिवर्सिटी अस्पताल (एकेयूएच) के डॉ. फैसल महमूद के साथ प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्री ने वालिका अस्पताल में एचआईवी संक्रमण से जुड़े स्क्रीनिंग रिजल्ट साझा किए। उन्होंने बताया कि 19 जून 2026 को प्रांतीय लोकपाल (ओम्बड्समैन) को सौंपी गई दूसरी जांच रिपोर्ट में 78 बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने और छह बच्चों की मौत की पुष्टि की गई है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की संचारी रोग नियंत्रण (सीडीसी) इकाई ने 22 अक्टूबर 2025 को वालिका अस्पताल से पत्र मिलने के बाद स्क्रीनिंग अभियान शुरू कर दिया था। मंत्री ने कहा कि 120 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान अधिक साक्ष्य जुटाने के लिए एक विशेष डेटा संग्रह फॉर्म भी तैयार किया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी जांच गोपनीय तरीके से हों, ताकि पीड़ित परिवारों को सामाजिक तौर पर अलग-थलग न किया जाए। सईद गनी ने कहा कि एचआईवी के 78मामलों की पुष्टि पीड़ित परिवारों से सीधे संपर्क के बाद की गई है, हालांकि कुल संक्रमितों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि सभी संक्रमित बच्चों का इलाज पांच प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में किया जा रहा है, जिनमें इंडस अस्पताल, आगा खान यूनिवर्सिटी अस्पताल (एकेयूएच) और डॉव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज शामिल हैं। उन्होंने कहा, "यह एक दीर्घकालिक बीमारी है और इसके लिए दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।" मंत्री ने मेडिकल वेस्ट के निपटान में कमियों को स्वीकार करते हुए कहा कि उचित व्यवस्था होने के बावजूद कुछ लोग निजी लाभ के लिए निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हैं। सिंध एचआईवी नियंत्रण अधिनियम, 2006 का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत मरीजों की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है, ताकि उनके परिवारों को सामाजिक कलंक का सामना न करना पड़े।आगा खान यूनिवर्सिटी अस्पताल के डॉ. फैसल महमूद ने कहा कि यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। अन्य क्षेत्रों से भी एचआईवी के मामले सामने आ रहे हैं और कुछ निजी क्लीनिकों में संक्रमण नियंत्रण संबंधी गंभीर खामियां पाई गई हैं। इंडस अस्पताल के डॉ. अब्दुल बारी ने कहा कि पाकिस्तान अभी भी एचआईवी और हेपेटाइटिस-सी के भारी बोझ का सामना कर रहा है। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों से मिलकर इस चुनौती का समाधान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संक्रामक रोगों पर नियंत्रण के लिए क्लीनिकों और अस्पतालों में हर मरीज के लिए नई और निष्फल (स्टरलाइज्ड) सिरिंज के उपयोग को हर हाल में सुनिश्चित करना होगा। पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही से जुड़े एचआईवी संक्रमण के कई मामले सामने आए हैं। इनमें वर्ष 2019 में सिंध के रतोडेरो में फैला एचआईवी प्रकोप सबसे गंभीर घटनाओं में से एक माना जाता है। उस समय कथित तौर पर संक्रमित सिरिंजों के दोबारा इस्तेमाल के कारण बड़ी संख्या में बच्चे एचआईवी की चपेट में आ गए थे। बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की जांच में असुरक्षित इंजेक्शन पद्धतियों को इसकी प्रमुख वजह बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, जून 2019 तक करीब तीन लाख की आबादी वाले रतोडेरो में 800 से अधिक बच्चों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हो चुकी थी। हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान यह मामला वैश्विक सुर्खियों से ओझल हो गया, लेकिन इसके बाद भी संक्रमण के नए मामले सामने आते रहे।
 
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