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एआईआईए में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सौश्रुतम् का समापन
By Virat baibhav | Publish Date: 17/7/2026 8:12:32 PM
एआईआईए में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सौश्रुतम् का समापन

नई दिल्ली। आयुष मंत्रालय भारत सरकार के अधीन स्वायत्तशासी संस्थान अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए)नई दिल्ली द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सौश्रुतम् 2026 का समापन समारोह संपन्न हुआ। यह संगोष्ठी 15 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित की गई जबकि 14 जुलाई को भगवान धन्वंतरि एवं आयुर्वेद शल्य चिकित्सा के जनक आचार्य सुश्रुत की जयंती के उपलक्ष्य में एक दिवसीय प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशाला का आयोजन किया गया। समापन समारोह में राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग की अध्यक्षा वैद्य मनीषा कोठेकर एवं दक्षिणी दिल्ली से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, एनसीआईएसएम के बोर्ड ऑफ  एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन के अध्यक्ष डॉॅ. सुश्रुत कनौजिया तथा पद्मश्री प्रो. मनोरंजन साहू विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर संगोष्ठी में सहभागिता करने वाले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वैद्य मनीषा कोठेकर ने आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा सौश्रुतम् जैसी संगोष्ठियों का नियमित आयोजन होना चाहिए क्योंकि इससे विद्यार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण और वैश्विक स्तर पर सीखने का अवसर प्राप्त होता है। ऐसे सफल आयोजन समाज में आयुर्वेदाचार्यों को केवल चिकित्सक ही नहीं बल्कि दक्ष शल्य चिकित्सक के रूप में भी स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग आयुर्वेद के हितों की रक्षा एवं उसके समग्र विकास के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। समापन समारोह के दौरान अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली और आईआईटी दिल्ली के मध्य हुए समझौता ज्ञापन को अगले पांच वर्षों के लिए विस्तारित किया गया जो आयुर्वेद एवं आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान नवाचार और अकादमिक सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगा। इस अवसर पर संस्थान के राजभाषा विभाग द्वारा प्रकाशित वार्षिक हिंदी पत्रिका आयुषवल्लरी के तृतीय संस्करण का विमोचन किया गया। साथ ही नेत्र रोग्य: सामान्य जानकारी एवं निवारण पुस्तक का भी लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक आमजन में नेत्र रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने उनसे जुड़े भ्रमों को दूर करने तथा सरल भाषा में वैज्ञानिक एवं प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराने का एक सार्थक प्रयास है। इसके अतिरिक्त सौश्रुतम्् 2026 की स्मारिका का भी अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। सौश्रुतम् 2026 की अवधारणा एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. वैद्य पी. के. प्रजापति ने कहा कि इस संगोष्ठी की परिकल्पना एक ऐसे वैश्विक मंच के रूप में की गई थी जहां वैज्ञानिक संवाद को बढ़ावा दिया जा सके साक्ष्य-आधारित शल्य चिकित्सा पद्धतियों का आदान-प्रदान हो नवीन तकनीकी नवाचारों का प्रदर्शन किया जा सके तथा आचार्य सुश्रुत की महान शल्य चिकित्सा परंपरा का सम्मानपूर्वक स्मरण किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह पहल आयुर्वेद और आधुनिक शल्य चिकित्सा विज्ञान के बीच अकादमिक सहयोग को सशक्त बनाने के साथ-साथ अनुसंधान नवाचार एवं शल्य शिक्षा में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सौश्रुतम् 2026 के आयोजन अध्यक्ष प्रो. डॉ. योगेश बडवे ने कहा हम आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार तथा आयुर्वेद समुदाय को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा में उत्कृष्टता प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, ग्रीस तथा भारत सहित विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं शल्य चिकित्सकों ने अपने अनुभव एवं विशेषज्ञता साझा की। संगोष्ठी में पद्मश्री प्रो. एम. साहू एवं पद्मश्री प्रो. के. के. ठाकराल सहित देशभर के 30 से अधिक प्रख्यात विशेषज्ञों तथा अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, आईएमएस-बीएचयू, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर, आईटीआरए, जामनगर एवं देश के अन्य प्रमुख शल्य चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों ने सहभागिता की। इसके अतिरिक्त एम्स, नई दिल्ली, एसजीपीजीआई, लखनऊ, जीएमसी, अगरतला तथा सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली के आधुनिक शल्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए जिससे आयुर्वेद और आधुनिक शल्य विज्ञान के मध्य बहुआयामी एवं सार्थक संवाद स्थापित हुआ। 
 
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