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समय पर कार्रवाई से बच सकती है सांप के काटने से जान
By Virat baibhav | Publish Date: 18/7/2025 7:57:17 PM
नई दिल्ली। मानसून के मौसम में सांप के काटने के मामले बढ़ जाते हैं, खासकर ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में जहां हरियाली ज्यादा होती है। भारत में सांप के काटने की घटनाएं एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 4.5 से 5.4 मिलियन लोगों को सांप काट लेते हैं। इनमें से 1.8 से 2.7 मिलियन मामलों में ज़हर का असर होता है। दुनिया में सांप के काटने से सबसे ज्यादा मौतें भारत में होती हैं। 2000 से 2019 के बीच भारत में करीब 12 लाख लोगों की मौत सांप के काटने से हुई है, यानी हर साल लगभग 58,000 मौतें। दुर्भाग्य से, ये आंकड़े पूरी तरह दर्ज नहीं हो पाते। सरकारी रिपोट्र्स में सिर्फ 10 प्रतिशत मौतें ही दिखाई गईं, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 20-30 प्रतिशत लोग ही अस्पताल जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में सांप के काटने से मरने का खतरा 1 में से 100 तक है। अधिकतर पीडि़त 30 से 69 वर्ष की आयु के होते हैं, और 25 प्रतिशत से ज़्यादा बच्चे 15 साल से कम उम्र के होते हैं। कुल 70 प्रतिशत मौतें आठ प्रमुख राज्यों में होती हैं, खासकर मानसून के समय। भारत सीरम्स एंड वैक्सीन्स और मैनकाइंड फार्मा कि ओर से जारी बयान में कहा गया कि नवंबर 2024 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सांप के काटने को सूचित करने योग्य बीमारी घोषित किया। अब सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को हर संदिग्ध या संभावित मामले की जानकारी देना अनिवार्य है। इससे आंकड़े बेहतर तरीके से दर्ज होंगे और देशभर में रोकथाम व इलाज की योजनाएं मजबूत बनेंगी। डीएचओ ने 2017 में सांप के काटने को ऐसी बीमारी का नाम दिया है जो गरम जगहों पर पाई जाती है और जिस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था। 2019 में एक वैश्विक रणनीति शुरू की गई थी जिसका उद्देश्य 2030 तक मौतों और गंभीर विकलांगताओं को आधा करना है।