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दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगेगी लगाम
By Virat baibhav | Publish Date: 4/8/2025 8:26:01 PM
दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगेगी लगाम

नई दिल्ली। दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी तरीके से फ़ीस की वृद्धि करने पर रोक लगाने के लिए सोमवार को दिल्ली विधानसभा में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने फीस नियंत्रण विधेयक पेश किया। सदन में दिल्ली विद्यालय शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक, 2025 प्रस्तुत करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज में यहां दिल्ली के लाखों अभिवाकों, करोड़ों बच्चों और एक ऐसी विरासत की समस्या का स्थायी समाधान लेकर आया हूं, जिस दशकों तक नजऱअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक पवित्र कार्य है एक ऐसा कर्तव्य जो हमें अपनी मातृभूमि की तरक्की और समृद्धि के लिए निभाना है। सूद ने यह भी कहा कि शिक्षा का मकसद पैसा कमाना नहीं, बल्कि ‘लर्निंग’ और राष्ट्र निर्माण होना चाहिए। मंत्री ने यह भी बताया कि यह शिक्षा का बिल दिल्ली के सभी पेरेंट्स के लिए हमारी ओर से एक छोटा-सा प्रयास है।  डॉ. मुखर्जी के वीजन को सम्मान देने का, और यह सुनिश्चित करने का कि शिक्षा दिल्ली के लोगों पर बोझ न बने, बल्कि उन्हें बेहतर भविष्य की ओर ले जाने वाला रास्ता बने। उन्होंने ऐतिहासिक दृष्टांत देते हुए केंद्र सरकार द्वारा दशकों से लटके विरासत के मुद्दे जैसे राम मंदिर, चेनाब ब्रिज, धारा 370, हर गांव तक बिजली पहुचाने के प्रयासों की चर्चा की और कहा कि अब दिल्ली सरकार भी राजधानी के पुराने और जटिल मुद्दों को सुलझाने में जुटी है, जिनमें एक अत्यंत महत्वपूर्ण लेजेंसी इशू है प्राइवेट स्कूलों की लगातार बढ़ती फीस। मंत्री ने स्पष्ट भी किया कि यह कोई हाल की समस्या नहीं, बल्कि पिछले कई दशकों से दिल्ली के माता-पिता को परेशान करने वाला सवाल रहा है। उन्होंने बीते वर्षों में सरकारी शिक्षा तंत्र की गिरती गुणवत्ता, स्कूलों की भारी कमी, और निजी स्कूलों की फीस वृद्धि की वजह से माता-पिता की वित्तीय और मानसिक कठिनाइयों का भी अपनी चर्चा में उल्लेख किया। पूर्व सरकारों पर कटाक्ष करते हुए सूद ने कहा कि पिछली सरकारों ने बार-बार सिर्फ दिखावे के लिए ही आदेश जारी किए थे लेकिन वे या तो शिक्षा माफिय़ाओं से डरते रहे या उनसे साठगांठ करते रहे। उन्होंने न  तो किसी स्कूल का कोई ऑडिट कराया, न ही  कोई रिकॉर्ड, सब अनौपचारिक आधार पर चलता रहा। शिक्षा माफिया के साथ मिलकर काम करते रहे।  उन्होंने यह भी बताया कि आप सरकार ने अपने कार्यकाल में केवल 20 नए स्कूल बनवाए, बाकी स्कूलों की स्वीकृति पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में दी गई थी। मंत्री ने कहा कि यह बिल न केवल एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाता है, बल्कि बच्चों, अभिभावकों और स्कूलों के सभी हितधारकों के हितों की रक्षा  भी करता है। अंत में सूद ने कहा कि यह बिल सही मायनों में नीचे से ऊपर की ओर दृष्टिकोण है, जिसमें पहली बार माता-पिता को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है। 
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