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उर्दू भाषा सिर्फ एक जबान नहीं गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान है: यादव
By Virat baibhav | Publish Date: 10/11/2025 7:53:31 PM
उर्दू भाषा सिर्फ  एक जबान नहीं गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान है: यादव

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम मुख्यालय में सोमवार को उर्दू दिवस का आयोजन और साहित्यिक वातावरण में किया गया। इस मौके पर मुशायरे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नगर निगम के उप महापौर जयभगवान यादव,स्थायी समिति की अध्यक्षए, सत्या शर्मा,नेता सदन प्रवेश वाही,तथा अतिरिक्त आयुक्त पंकज नरेश अग्रवाल सहित निगम के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। उप महापौर  जयभगवान सिंह यादव ने अपने संबोधन में कहा कि उर्दू भाषा सिर्फ  एक जबान नहीं बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान है। यह भाषा दिलों को जोडऩे का काम करती है। दिल्ली नगर निगम सदैव सभी भाषाओं और संस्कृतियों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होने कहा कि दिल्ली नगर निगम प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उर्दू दिवस इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा उर्दू की खूबसूरती उसकी नजाकत और अदब में छिपी है। उन्होंने कहा कि हिन्दी उर्दू भाई-बहन है। हमें गर्व है कि निगम परिवार में अनेक अधिकारी और कर्मचारी इस भाषा को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। नेता सदन प्रवेश वाही ने कहा कि भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है। उर्दू दिवस हमें यह संदेश देता है कि हम सभी भाषाओं के प्रति समान आदर और प्रेम बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यह किसी धर्म विशेष की भाषा नहीं है बल्कि तहजीब और अदब की भाषा है। कार्यक्रम की विशेष आकर्षण एक भव्य मुशायरा संध्या रही, जिसमें देश के प्रसिद्ध शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर स्वर्गीय राहत इंदौरी के सुपुत्र सतलज इंदौरी ने अपनी शायरी पेश कर सभागार में भावनाओं और तालियों की गूंज भर दी। इनके साथ-साथ हिंदी कवि मोहन मुन्तजिर शायर अकमल बलरामपुरी, दमदार बनारसी, मुजम्मिल अयूब तथा कवयित्री निधि कशिश ने रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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