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बुजुर्गों में स्मार्टफोन की लत से बढ़ सकता है डिप्रेशन का खतरा, नई रिसर्च में बड़ा खुलासा
By Virat baibhav | Publish Date: 2/7/2026 4:16:06 PM
बुजुर्गों में स्मार्टफोन की लत से बढ़ सकता है डिप्रेशन का खतरा, नई रिसर्च में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। आज के समय में स्मार्टफोन हर उम्र के लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। खासकर बुजुर्गों के लिए यह तकनीक अपने परिवार और दुनिया से जुड़े रहने का एक आसान जरिया है, लेकिन हाल ही में एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि अगर स्मार्टफोन का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा या आदत के तौर पर किया जाए तो यह मानसिक स्वास्थ्य पर उल्टा असर भी डाल सकता है। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में इसके कारण डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।  यह अध्ययन रटगर्स स्कूल ऑफ सोशल वर्क के प्रोफेसर चिएन-चुंग हुआंग के नेतृत्व में किया गया और इसे जेएमआईआर एजिंग नाम की जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इसमें चीन के ग्वांगझू शहर के 87 कम्युनिटीज में रहने वाले 2,585 बुजुर्ग लोगों को शामिल किया गया। इन लोगों से उनके स्मार्टफोन इस्तेमाल करने की आदतों, सोशल लाइफ और रोजमर्रा की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली गई। साथ ही उनकी उम्र, शिक्षा, आय और पारिवारिक स्थिति जैसे आंकड़े भी इकट्ठा किए गए। शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल करके यह समझने की कोशिश की कि कौन-कौन से कारण डिप्रेशन से सबसे ज्यादा जुड़े हुए हैं। इसमें सबसे बड़ा कारण कम सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना पाया गया। इसके बाद स्मार्टफोन की लत या बहुत ज्यादा इस्तेमाल को दूसरा बड़ा कारण माना गया। जिन लोगों में स्मार्टफोन का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा और आदतन पाया गया, उनमें डिप्रेशन के लक्षण भी ज्यादा देखे गए। स्टडी में यह भी पाया गया कि फोन का इस्तेमाल हमेशा नुकसानदायक नहीं होता। अगर बुजुर्ग लोग वीडियो कॉल, मैसेजिंग या फोटो शेयरिंग के जरिए अपने परिवार और दोस्तों से जुड़े रहते हैं तो यह उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। समस्या तब शुरू होती है जब फोन सिर्फ अकेले बैठकर वीडियो देखने, स्क्रॉल करने या गेम खेलने का जरिया बन जाता है। इससे व्यक्ति धीरे-धीरे असल दुनिया के लोगों से दूरी बनाने लगता है। एक शोधकर्ता ने बताया कि जब कोई बुजुर्ग व्यक्ति अपने फोन को असली सामाजिक जीवन की जगह इस्तेमाल करने लगता है तो यह डिप्रेशन का एक बड़ा संकेत हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि फोन ही बीमारी की वजह है, बल्कि यह कि फोन का गलत इस्तेमाल सामाजिक दूरी को बढ़ा सकता है। स्टडी में यह भी सामने आया कि कुछ खास समूहों में डिप्रेशन का खतरा ज्यादा देखा गया। जैसे वे बुजुर्ग पुरुष जिनकी शिक्षा कम थी और जो स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल करते थे। इनके लिए डिजिटल दुनिया को समझना थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए वे अक्सर सिर्फ मनोरंजन वाले कंटेंट पर निर्भर हो जाते हैं और धीरे-धीरे अकेलेपन में चले जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ, ज्यादा पढ़े-लिखे और अच्छे आर्थिक हालात वाले बुजुर्ग भी अगर फोन की लत में फंस जाते हैं तो उनके लिए भी अकेलापन और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह जरूरी नहीं है कि ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल सीधे डिप्रेशन का कारण हो। यह भी हो सकता है कि जो लोग पहले से अकेलापन या उदासी महसूस कर रहे हों, वे ज्यादा फोन का इस्तेमाल करने लगें। यानी यह रिश्ता एक चक्र की तरह हो सकता है, जहां दोनों चीजें एक-दूसरे को बढ़ाती हैं।
 
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