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भारत में पीएमएस इंडस्ट्री के अगले विकास के चरण में पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा की होगी अहम भूमिका: सेबी
By Virat baibhav | Publish Date: 11/6/2026 3:49:15 PM
नई दिल्ली। भारत में पीएमएस इंडस्ट्री के अगले विकास के चरण में पारदर्शिता, निवेशक सुरक्षा और मजबूत शासन-व्यवस्था की अहम भूमिका होगी। यह बयान भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनोज कुमार ने गुरुवार को दिया। कुमार ने एपीएमआई लीडरशीप कॉन्क्लेव 2026 में कहा कि भारत की पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री की एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) करीब 42 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है और 2.1 लाख अधिक निवेश इसमें निवेश कर रहे हैं।कुमार ने कहा, "भारत में पीएमएस इंडस्ट्री एक अहम मोड़ पर है। जैसे-जैसे निवेशकों की उम्मीदें बदल रही हैं और पर्सनलाइज्ड वेल्थ मैनेजमेंट सॉल्यूशन की मांग बढ़ रही है, इस इंडस्ट्री के पास भारत के इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम के एक अहम स्तंभ के तौर पर उभरने का मौका है।"उन्होंने कहा कि इस सेक्टर की टिकाऊ विकास के लिए पूरी इंडस्ट्री में स्टैंडर्डाइजेशन, बेहतर डेटा पारदर्शिता और एक मजबूत वितरण सिस्टम बहुत जरूरी होंगे।कुमार के अनुसार, एक मजबूत, भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पीएमएस इंडस्ट्री बनाने के लिए टियर-2 और टियर-3 मार्केट में गहरी पैठ, निवेशकों में ज्यादा जागरूकता, जिम्मेदार वितरण प्रथाएं और पक्षकारों के बीच सहयोग बहुत जरूरी होगा।यह कॉन्क्लेव 'एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया' (एपीएमआई) ने आयोजित किया था, जो सेबी-रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजरों का प्रतिनिधि संगठन है।एपीएमआई के चेयरमैन बिहारीलाल देवरा ने कहा कि पीएमएस इंडस्ट्री भारत के वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर का एक अहम हिस्सा बन गई है। इसकी वजह निवेशकों में बढ़ती जागरूकता, कस्टमाइज्ड इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशन की बढ़ती मांग और समर्थित नियामत ढांचा है।