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ट्रंप प्रशासन की चेतावनी, अमेरिका में चुनावी डेटा पर साइबर हमले का खतरा
By Virat baibhav | Publish Date: 17/7/2026 4:40:27 PM
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हाल ही में सार्वजनिक किए गए गोपनीय खुफिया और साइबर सुरक्षा आकलनों में चेतावनी दी कि देश के मतदाता पंजीकरण डेटाबेस अब भी विदेशी साइबर हमलों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। अगर यह डेटा चोरी होता है तो उसका दुरुपयोग कई वर्षों तक किया जा सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी सुरक्षा पर दिए गए संबोधन के बाद जारी इन दस्तावेजों में कहा गया कि मतदाता पंजीकरण डेटाबेस विदेशी खुफिया एजेंसियों और साइबर हमलावरों के लिए सबसे आकर्षक लक्ष्यों में से एक हैं। इनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालना और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर करना हो सकता है।व्हाइट हाउस द्वारा जारी अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में अमेरिका के सभी 50 राज्यों के मतदाता पंजीकरण सिस्टम को हैक करने की कोशिश की गई। इनमें से कम से कम 20 राज्यों में साइबर हमलावरों को सेंध लगाए।रिपोर्ट में कहा गया, "राज्य स्तर के मतदाता पंजीकरण डेटाबेस विदेशी विरोधी देशों के लिए बेहद आकर्षक लक्ष्य हैं।" इसमें यह भी चेतावनी दी गई है कि मतदाताओं की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी लीक होने का खतरा सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव लंबे समय तक रह सकते हैं।रिपोर्ट के अनुसार, चोरी किए गए मतदाता डेटा का इस्तेमाल डाक मतपत्र के लिए फर्जी आवेदन करने, मतदाता पंजीकरण रिकॉर्ड में बदलाव करने, मतदान केंद्र बदलने या मतदाता का नाम सूची से हटाने जैसे कामों में किया जा सकता है।इस आकलन रिपोर्ट में वर्ष 2016 के बाद से चुनावी ढांचे पर हुए कई साइबर हमलों का भी जिक्र किया गया। इनमें वोटर रजिस्ट्रेशन डेटाबेस की जांच करने की रूस की कोशिशें, वोटर रजिस्ट्रेशन की जानकारी हासिल करने का ईरान का प्रयास और चुनाव से जुड़े नेटवर्क एवं आम लोगों के लिए उपलब्ध वोटर डेटा को निशाना बनाने वाली चीन की संदिग्ध साइबर गतिविधियां शामिल हैं।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि हाल ही में सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेज यह साबित करते हैं कि अमेरिका लंबे समय से जानता था कि उसकी चुनावी व्यवस्था विदेशी साइबर खतरों के संपर्क में है।