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चित्रा के. सोमन: कड़ी मेहनत से बनाई पहचान, कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता सिल्वर मेडल, ग्रांड प्रिक्स में भी लहराया परचम
By Virat baibhav | Publish Date: 9/7/2026 3:26:15 PM
चित्रा के. सोमन: कड़ी मेहनत से बनाई पहचान, कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता सिल्वर मेडल, ग्रांड प्रिक्स में भी लहराया परचम

नई दिल्ली। कुछ खिलाड़ियों में टैलेंट कूट-कूटकर भरा होता है, तो कुछ खिलाड़ी कड़ी मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाते हैं। ऐसी ही खिलाड़ी रहीं चित्रा.के.सोमन, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर 400 मीटर की दौड़ में देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया।   चित्रा का जन्म 10 जुलाई, 1983 को केरल के कोट्टायम में हुआ। चित्रा को शुरुआत से ही दौड़ने का काफी शौक था। वह स्कूल स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। जल्द ही उनकी काबिलियत को कोच ने पहचाना और चित्रा ने बतौर धावक करियर बनाने का फैसला कर लिया। साधारण परिवार में जन्मीं चित्रा ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत के दम पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ती चली गईं। साल 2004 में हुए एथेंस ओलंपिक में 4x400 मीटर रिले स्पर्धा में चित्रा ने हिस्सा लिया और वह सातवें स्थान पर रहीं। टीम स्पर्धा में उन्होंने मंजीत कौर, के.एम.बीनामोल और राजविंदर कौर के साथ मिलकर 4x400 मीटर रिले में नेशनल रिकॉर्ड बनाया। टीम की साथी खिलाड़ियों संग मिलकर उन्होंने यह रिले 3:26.89 मिनट में पूरी की। इस प्रदर्शन ने विश्व स्तर पर उनको पहचान दिलाने का काम किया। साल 2006 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में चित्रा का प्रदर्शन लाजवाब रहा और वह सिल्वर मेडल जीतने वाली रिले टीम का हिस्सा रहीं। इसके बाद, साल 2007 में हुई एशियाई ग्रांड प्रिक्स में भी चित्रा का जलवा देखने को मिला। उन्होंने 400 मीटर की दौड़ में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। 400 मीटर की दौड़ को चित्रा ने 51.30 सेकंड में पूरा किया, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। साल 2007 में चित्रा को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारतीय सरकार द्वारा 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। चित्रा ने उस दौर में इस खेल में अपनी पहचान बनाई, जब काफी सीमित साधन हुआ करते थे। वह उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं, जो छोटे शहर से आकर अपने खेल के दम पर विश्व में पहचान बनाने की इच्छा रखती हैं।
 
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