नई दिल्ली। हमारी सरकार दिल्ली की सडक़ सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए आधुनिक परिवहन प्रणाली विकसित कर रही है। आने वाले दिनों में दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का एक अलग ही रूप देखने को मिलेगा। यह कहना है दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का। मुख्यमंत्री ने यह बात गुरुवार को डीटीसी नंद नगरी डिपो में अत्याधुनिक और पूर्णत: स्वचालित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) की आधारशिला रखते हुई कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह केंद्र दिल्ली की परिवहन व्यवस्था में तकनीकी पारदर्शिता और सुरक्षा के एक नए युग की शुरुआत करेगा। कार्यक्रम के दौरान दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ पंकज सिंह, सांसद मनोज तिवारी, दिल्ली विधान सभा उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधायक डॉ जितेंद्र महाजन, अजय महावर सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नंद नगरी डिपो में यह नया एटीएस ट्रांस-यमुना क्षेत्र के लाखों वाहन चालकों को राहत देगा। उन्होंने कहा कि राजधानी में बढ़ते वाहनों की संख्या को देखते हुए, सटीक, निष्पक्ष और डिजिटल तकनीकों से युक्त फिटनेस परीक्षण प्रणाली समय की मांग है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में दिल्ली में 1.53 करोड़ से अधिक पंजीकृत वाहन हैं, जिनमें से लगभग 6.5 लाख वाणिज्यिक वाहनों को हर साल फिटनेस प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। फिर भी, फिलहाल केवल एक ही ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (झुलझुली में) कार्यरत है, जहां सालाना केवल 47,919 वाहनों का परीक्षण हो पाता है।
पूरी तरह डिजिटल होगा एटीएस
मुख्यमंत्री ने एटीएस की विशेषताओं को साझा करते हुए कहा कि यह नया ऑटोमैटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) पूरी तरह डिजिटल होगा और इसमें किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाएगी। यह अत्याधुनिक केंद्र 40 मीटर म 26 मीटर के प्री-इंजीनियर्ड भवन में संचालित होगा, जिसमें आठ कार्यात्मक कक्ष, टॉयलेट ब्लॉक, पैंट्री और पैनल रूम जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने आगे बताया कि यह एटीएस चार-लेन प्रणाली पर आधारित होगा, जिसमें दो लेन भारी वाहनों (एचएमवी), एक लेन हल्के वाहनों (एलएमवी) और एक लेन दोपहिया वाहनों के परीक्षण के लिए समर्पित होगी। यहां वाहनों के उत्सर्जन, रोलर ब्रेक, सस्पेंशन (सामने और पीछे), अंडरबॉडी निरीक्षण और हेडलाइट एलाइनमेंट जैसे उन्नत परीक्षण किए जाएंगे।
डीटीसी को प्रतिवर्ष लगभग 3 करोड़ रुपए की आय होने की संभावना: सीएम
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस केंद्र की वार्षिक परीक्षण क्षमता 72,000 वाहनों की होगी, जिसमें 20,000 दोपहिया वाहन भी शामिल हैं। इसके संचालन से दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) को प्रतिवर्ष लगभग 3 करोड़ रुपए की आय होने की संभावना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 10 करोड़ रुपए है और इसके लिए आवश्यक निधि परिवहन विभाग की राज्य पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के अंतर्गत प्रस्तावित की गई है। उन्होंने आगे बताया कि तकनीकी सलाहकार के रूप में भारत सरकार की संस्था इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी को नियुक्त किया गया है ताकि पूरा प्रोजेक्ट भारत सरकार के मानकों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के अनुरूप हो।
तेहखंड डिपो में भी होगा एक और एटीएस का निर्माण
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने यह जानकारी दी कि शीघ्र ही एक और एटीएस का निर्माण डीटीसी तेहखंड डिपो (दक्षिण-पूर्व दिल्ली) में किया जाएगा, जिससे दिल्ली की फिटनेस परीक्षण क्षमता और मजबूत होगी। साथ ही उन्होंने बताया कि डिजिटल इंडिया और ग्रीन इंडिया के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह एक अहम कदम है। हमारी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजधानी में हर नागरिक के लिए एक सुरक्षित, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन ट्रांसपोर्ट सिस्टम देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ पंकज सिंह ने बताया कि डीटीसी नंद नगरी डिपो में ऑटोमैटिक व्हीकल टेस्टिंग स्टेशन की आधारशिला रखना सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि दिल्ली के परिवहन तंत्र को और अधिक सुरक्षित, आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।