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बेंगलुरु
ग्रेटर बेंगलुरु में समानांतर वोटर लिस्ट सत्यापन पर हाईकोर्ट सख्त, आयोग और राज्य सरकार को नोटिस
By Virat baibhav | Publish Date: 8/7/2026 4:12:36 PM
ग्रेटर बेंगलुरु में समानांतर वोटर लिस्ट सत्यापन पर हाईकोर्ट सख्त, आयोग और राज्य सरकार को नोटिस

बेंगलुरु। कर्नाटक हाईकोर्ट ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के कुछ चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर कर्नाटक सरकार, कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग (केएसईसी) और भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।   यह याचिका महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि केवल कुछ चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में समानांतर रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) कराना कानूनी और संवैधानिक रूप से वैध नहीं है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह प्रक्रिया मनमानी, भेदभावपूर्ण है और देश में मतदाता सूची संशोधन की स्थापित व्यवस्था के भी खिलाफ है। दरअसल, कर्नाटक हाईकोर्ट में दायर इस याचिका में कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग (केएसईसी) के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के कुछ चुनिंदा वार्डों में अलग से एसआईआर कराया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भारत निर्वाचन आयोग पहले से ही पूरे देश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चला रहा है और कर्नाटक को इस प्रक्रिया के तीसरे चरण (फेज-III) में शामिल किया गया है। ऐसे में राज्य चुनाव आयोग द्वारा अलग से एसआईआर कराना एक ही मतदाता के लिए दो समानांतर सत्यापन अभियान चलाने जैसा है। बता दें कि यह याचिका बेंगलुरु के निवासी एम. विवेक, एम. श्रीनाथ, एस.टी. मंजूनाथ, टी.आर. सतीश और के.आर. आनंद मूर्ति ने दायर की है। इसमें कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग, कर्नाटक सरकार और भारत निर्वाचन आयोग को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि चुनिंदा क्षेत्रों में अलग से चलाए जा रहे इस विशेष पुनरीक्षण की वैधता और संवैधानिकता की जांच की जाए। फिलहाल हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की है।
 
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