ताजा खबरें
दिल्ली नगर निगम टोल टेंडर में करोड़ों रुपये के नुकसान का आरोप
By Virat baibhav | Publish Date: 5/8/2026 8:25:39 PM
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के टोल टैक्स कलेक्शन टेंडर को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। विधायक कुलदीप कुमार और एमसीडी के सह-प्रभारी प्रवीण कुमार ने बुधवार को कहा कि करीब 5,500 करोड़ रुपये के टोल कलेक्शन टेंडर में जानबूझकर सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी को बाहर कर कम बोली वाली कंपनी को ठेका दिया गया, जिससे एमसीडी को लगभग 680 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कीण् कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली में भाजपा की चार इंजन की सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। एमसीडी में बीते 5 जून को लगभग 5,500 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन टेंडर जारी किया गया, लेकिन इस प्रक्रिया में नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। सामान्यत: पांच करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को स्टैंडिंग कमेटी की मंजूरी जरूरी होती है, लेकिन हजारों करोड़ रुपये के इस टेंडर को बिना मंजूरी के आगे बढ़ाया गया,जो नियमों के विपरीत है उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में जानबूझकर ऐसी शर्तें रखी गईं, जिससे पसंदीदा कंपनी को फायदा मिल सके, सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनियों के युक्त उपक्रम ने करीब 5,500 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। इसके बावजूद तकनीकी कारणों का हवाला देकर इस बोली को अयोग्य घोषित कर दिया गया। बाद में टेंडर अन्य कंपनी को लगभग 4,820 करोड़ रुपये में दे दिया गया। इससे एमसीडी को करीब 680 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ। आप नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस कंपनी को यह ठेका दिया गया, वही पिछले पांच वर्षों से एमसीडी के टोल कलेक्शन का काम कर रही है। एमसीडी नेता विपक्ष अंकुश नारंग ने पहले भी निगम प्रशासन को पत्र लिखकर आगाह किया था कि इस कंपनी के कारण निगम के राजस्व को नुकसान हो सकता है। बीते 21 जुलाई को इस संबंध में निगम प्रशासन को लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन उसके बावजूद किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। वहीं एमसीडी के सह-प्रभारी प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी टोल कलेक्शन के दौरान नकद वसूली कर निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचा रही थी। इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायतें की गई थीं, लेकिन निगम प्रशासन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया, यह भी दावा किया गया कि अब संबंधित कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अगर किसी कंपनी पर पहले से आरोप व कानूनी कार्रवाई लंबित है तो उसे दोबारा इतना बड़ा ठेका देना कई सवाल खड़े करता है, पार्टी की तरफ से आरोप लगाया गया कि यह मामला केवल टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता का नहीं, बल्कि निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचाने और कथित भ्रष्टाचार का है। पूरे टेंडर की निष्पक्ष जांच कराई जाए सभी संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और अगर किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।