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दिल्ली में 2.30 लाख घरों की छतों पर लगेंगे मुफ्त सोलर पैनल
By Virat baibhav | Publish Date: 1/9/2026 7:57:34 PM
नई दिल्ली। दिल्ली के ऊर्जा परिदृश्य में बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने सौर ऊर्जा को घर-घर तक पहुंचाने के लिए दिल्ली सौर ऊर्जा नीति का नया संस्करण (दूसरा संशोधन) पेश किया है। नई पॉलिसी के तहत, वित्त वर्ष 2025-26 में औसतन 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले घरेलू ग्राहकों के लिए 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम बिना किसी शुरुआती खर्च के लगाए जाएंगे। विशेष बात यह है कि 200 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले ग्राहक सोलर सिस्टम लगाने के बाद न सिर्फ सब्सिडी का फायदा पाते रहेंगे, बल्कि बचाई गई बिजली के बदले उन्हें एनर्जी-सेविंग इंसेंटिव भी मिलेगा। मंगलवार को दिल्ली सोलर एनर्जी पॉलिसी-2023 (दूसरा संशोधन) के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के विजन को दिल्ली में और मजबूत करते हुए सरकार ने ऐसी व्यवस्था तैयार की है, जिसमें आम परिवार के लिए सोलर सिस्टम लगाना आसान और लगभग बिना वित्तीय बोझ के होगा। इस नीति से दिल्ली के लोग बिजली इस्तेमाल करने के साथ-साथ बिजली भी पैदा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन ‘विकसित भारत’ का है और विकसित भारत का रास्ता निश्चित रूप से ‘विकसित दिल्ली’ से होकर जाता है। इसी सोच के अनुरूप दिल्ली सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। दिल्ली में सौर ऊर्जा की संभावनाएं बहुत अधिक हैं और सरकार का लक्ष्य केवल बिजली बिल कम करना नहीं, बल्कि दिल्ली के घरों को बिजली पैदा करने वाला घर बनाना है। प्रेस वार्ता के दौरान दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद भी उपस्थित थे।
3 किलोवाट तक का सोलर सिस्टम बिना अग्रिम लागत
मुख्यमंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत 400 यूनिट तक की औसत मासिक बिजली खपत वाले पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को, सोलर सिस्टम की स्थापना की तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर, 3 किलोवाट तक का रूफटॉप सोलर सिस्टम बिना किसी अग्रिम लागत के उपलब्ध कराया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली 78,000 रुपये की सब्सिडी के साथ दिल्ली सरकार भी 78,000 रुपये की पूंजीगत सब्सिडी देगी। इसके अलावा, दिल्ली सरकार अतिरिक्त टॉप-अप के माध्यम से सब्सिडी और सोलर प्लांट की टेंडर में तय लागत के बीच के अंतर को भी पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि पहले सोलर सिस्टम लगवाने के लिए उपभोक्ताओं को अग्रिम राशि का भुगतान करना पड़ता था, जबकि प्रोत्साहन राशि बाद के वर्षों में मिलती थी। नई नीति में इस व्यवस्था को बदलते हुए शुरुआत में ही वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी गई है ताकि उपभोक्ताओं पर शुरुआत में आर्थिक बोझ न पड़े। सरकार की ओर से लगाए गए सोलर सिस्टम का संबंधित वेंडर के लिए पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव करना अनिवार्य होगा। इसके बाद उपभोक्ताओं के पास डिस्कॉम के माध्यम से सोलर सिस्टम के पूरे 25 वर्ष के जीवनकाल तक उसके रखरखाव को जारी रखने का विकल्प होगा। इससे उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम के रखरखाव की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। पात्र उपभोक्ताओं को मासिक बिजली बिल में नेट मीटरिंग का लाभ भी मिलेगा।