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टीएमसी के गढ़ में 'ममता' को मां की चुनौती, 28 हजार मतों से पानीहाटी में रत्ना देबनाथ की जीत
By Virat baibhav | Publish Date: 4/5/2026 11:08:54 PM
टीएमसी के गढ़ में 'ममता' को मां की चुनौती, 28 हजार मतों से पानीहाटी में रत्ना देबनाथ की जीत

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के सोमवार को निकले नतीजों में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। एक तरफ भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने की स्थिति में आ गई। दूसरी तरफ, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को भवानीपुर से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।  इस बार के पश्चिम बंगाल चुनाव में कई सीटों पर नजर रही, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान अगर किसी सीट ने खींचा, तो वह पानीहाटी का रहा। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित पानीहाटी विधानसभा सीट एक महत्वपूर्ण शहरी निर्वाचन क्षेत्र है, जो दमदम लोकसभा का हिस्सा है। यह पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का मजबूत गढ़ रहा था, जहां निर्मल घोष 2016 और 2021 में विजयी हुए थे।इस बार के चुनाव परिणाम में भाजपा ने रत्ना देबनाथ को उम्मीदवारी सौंपी और उनकी जीत का औपचारिक ऐलान ही किया जा रहा था। इस सीट से रत्ना देबनाथ ने टीएमसी के तीर्थांकर घोष को 28,836 मतों के अंतर से हरा दिया। रत्ना देबनाथ ने राजनीति में आना नहीं चुना था। वह अपने परिवार के साथ खुश थीं।लेकिन, आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में उनकी पुत्री के साथ जो हैवानियत हुई, उसने उनके लिए रास्ता बना दिया, जिसके जरिए वह पहले पानाहाटी पहुंचीं और अब विधानसभा भी जाने वाली हैं। कहने का मतलब है कि उन्होंने खुद को सिस्टम का हिस्सा बनाया, ताकि अपनी और दूसरों की भी बेटियों को न सिर्फ सुरक्षित वातावरण मिले, बल्कि किसी के साथ अन्याय भी न हो।जब भाजपा ने रत्ना देबनाथ को प्रत्याशी के रूप में फाइनल किया तो उसी समय से उनकी जीत तय मानी जा रही थी। रत्ना देबनाथ की इस चुनाव में उम्मीदवारी ने महिलाओं के दिल में बड़ा प्रभाव डाला है। चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह से हर वर्ग की महिलाओं ने गले लगाकर आंसुओं की धारा बहाकर रत्ना का स्वागत कर इस लड़ाई में उनके साथ खड़ा होने का वादा किया, यह चुनाव में एक बड़ा फैक्टर साबित हुआ। इस बार किसी पार्टी का नहीं बल्कि एक मां होने के नाते महिलाओं ने एक मां का साथ देने का फैसला किया, जो चुनाव प्रचार में साफ दिख रहा था।इस वर्ष विधानसभा चुनाव प्रचार में आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में महिला जूनियर डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत की घटना को भाजपा ने जोरशोर से उठाया। चुनाव प्रचार के समय ही अलग-अलग पार्टी को सपोर्ट करने वाली महिलाओं ने एकजुट होकर इंसाफ की लड़ाई में रत्ना के साथ खड़ा होने का ऐलान किया। हर महिला ने 'अभया' को अपनी बेटी मानते हुए इस इंसाफ में खुद को रत्ना के साथ खड़ा कर दिया।
 
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