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दूसरी तिमाही में गर्भवती महिलाएं करें ये आसान योगासन, बढ़ेगी ताकत और लचीलापन
By Virat baibhav | Publish Date: 10/5/2026 5:14:14 PM
दूसरी तिमाही में गर्भवती महिलाएं करें ये आसान योगासन, बढ़ेगी ताकत और लचीलापन

नई दिल्ली। आज दुनियाभर में मदर्स डे मनाया जा रहा है। मां बनने की यह यात्रा हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत और यादगार समय होता है। खासकर प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही वह दौर होता है जब शरीर में नई ऊर्जा आती है, थकान कम होती है और मूवमेंट बढ़ने लगता है। इस फेज को “बढ़ती ताकत और मूवमेंट का समय” भी कहा जाता है।  ऐसे में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं की सेहत को ध्यान में रखते हुए इस दौरान हल्के और सुरक्षित योगासनों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी है। इससे शरीर में ताकत बढ़ती है, लचीलापन आता है, पोस्चर सुधरता है और मन भी शांत होता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, दूसरी तिमाही वह समय है जब महिला अपनी बढ़ती हुई ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल कर सकती है। सही योगासन करने से न सिर्फ शारीरिक ताकत बढ़ती है बल्कि प्रसव के लिए शरीर को तैयार करने में भी मदद मिलती है। इन योगासनों को शामिल करें अपनी दिनचर्या में ताड़ासन से लेकर सुखासन व शवासन समेत यहां दिए कुछ योगासनों को शामिल करें। ताड़ासन का अभ्यास खड़े होकर किया जाता है। इसके लिए दोनों पैरों को जोड़कर सीधे खड़े रहें, हाथ ऊपर की ओर उठाएं। इससे पूरा शरीर फैलता है, रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और संतुलन बेहतर होता है। वहीं, वृक्षासन के लिए एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर को घुटने के पास रखें और हाथ जोड़कर ऊपर उठाएं। दीवार का सहारा लेकर भी कर सकती हैं। यह आसन संतुलन और एकाग्रता बढ़ाता है। सुखासन भी महत्वपूर्ण आसन है। इसके लिए आराम की मुद्रा में फर्श पर बैठें, पैर मोड़कर रखें। इसमें गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। इससे मन शांत होता है और कमर को आराम मिलता है। वहीं, शवासन के लिए पीठ के बल लेटकर पूरा शरीर ढीला छोड़ दें। दूसरी तिमाही में तकिए का सहारा लेकर साइड में भी कर सकती हैं। इससे थकान दूर होती है और गहरी नींद आती है। विपरीतकरणी के अभ्यास के लिए दीवार के सहारे पैर ऊपर करके लेटें। इससे सूजन कम होती है और रक्त संचार बेहतर होता है। शंखासन पेट और कमर के आसपास की मांसपेशियों को हल्का व्यायाम देता है। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इन आसनों का अभ्यास धीरे-धीरे और आराम से करें। अगर कहीं दर्द हो या असुविधा महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं। डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। दूसरी तिमाही में योग न सिर्फ मां की सेहत सुधारता है बल्कि आने वाले बच्चे के लिए भी अच्छा वातावरण बनाता है।

 
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