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जन्म के 6 महीने बाद बच्चों के आहार में बदलाव जरूरी, उम्र के हिसाब से ऐसे बढ़ाएं क्वांटिटी
By Virat baibhav | Publish Date: 14/5/2026 3:01:23 PM
जन्म के 6 महीने बाद  बच्चों के आहार में बदलाव जरूरी, उम्र के हिसाब से ऐसे बढ़ाएं क्वांटिटी

नई दिल्ली। बच्चों का सही विकास तभी होता है, जब उनका खानपान उनकी उम्र के हिसाब से सही और संतुलित हो। अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि सिर्फ दूध ही छोटे बच्चों के लिए काफी है, लेकिन जन्म के 6 महीने के बाद सिर्फ दूध से संपूर्ण पोषण नहीं मिल पाता। ऐसे में ठोस और पौष्टिक आहार की भी जरूरत होती है। इसी को पूरक आहार कहा जाता है। यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत जरूरी होता है।  महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर बताया कि जब बच्चा 6 महीने का हो जाता है, तो उसके शरीर की जरूरतें बढ़ने लगती हैं। इस समय उसे दूध के साथ-साथ घर का बना हल्का और पौष्टिक खाना देना शुरू करना चाहिए। इसमें गाढ़ी दाल के साथ चावल, खिचड़ी, हरी सब्जियां, दही, घी और थोड़ी मात्रा में तेल शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा पीले और नारंगी रंग के फल और सब्जियां जैसे केला, पपीता, गाजर और कद्दू भी बहुत फायदेमंद होते हैं। ये सभी चीजें बच्चे को जरूरी विटामिन और ऊर्जा देती हैं। शुरुआत में बच्चे को बहुत कम मात्रा में खाना देना चाहिए। लगभग 3 से 4 चम्मच से शुरुआत करें और देखें कि बच्चा कैसे प्रतिक्रिया देता है। अगर बच्चा अच्छे से खा रहा है और पचा पा रहा है, तो धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाई जा सकती है। आमतौर पर 6 से 7 महीने के बच्चे को दिन में दो बार एक छोटी कटोरी खाना दिया जा सकता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसकी भूख और जरूरतें भी बढ़ती हैं। 7 से 8 महीने के बच्चे को दिन में दो कटोरी भोजन दिया जा सकता है। 9 से 11 महीने के बच्चे के लिए यह मात्रा बढ़ाकर तीन कटोरी तक की जा सकती है। वहीं 12 से 24 महीने के बच्चे को दिन में चार से पांच कटोरी तक हल्का और पौष्टिक खाना दिया जा सकता है। इसके साथ यह भी जरूरी है कि माता-पिता बच्चे की भूख के संकेतों को समझें। हर बच्चे की भूख अलग होती है, इसलिए उसे जबरदस्ती खिलाने की बजाय उसके संकेतों को समझकर खाना देना चाहिए। बच्चे को खेल-खेल में और प्यार से खाना खिलाना चाहिए, ताकि वह खाने में रुचि ले। छोटे बच्चों को पहले दूध पिलाना चाहिए और उसके बाद ठोस भोजन देना चाहिए। इससे बच्चे को दोनों तरह का पोषण मिल जाता है।
 
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