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‘सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम’ क्या है? शिशु से जुड़े जोखिम को कैसे कम करें
By Virat baibhav | Publish Date: 17/5/2026 3:00:09 PM
‘सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम’ क्या है? शिशु से जुड़े जोखिम को कैसे कम करें

नई दिल्ली। हर माता-पिता अपने शिशु को लेकर बेहद चिंतित रहते हैं। पहली बार माता-पिता बनने पर चिंताएं और भी बढ़ जाती हैं। ऐसी ही एक गंभीर चिंता है ‘सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम’ या एसआईडीएस, जिसमें शिशु की बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक मौत हो जाती है। यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) के अनुसार, एसआईडीएस दुर्लभ है, लेकिन माता-पिता को इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए ताकि वे जोखिम को काफी हद तक कम कर सकें। ‘सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम’ (एसआईडीएस) वह स्थिति है जिसमें कोई स्वस्थ शिशु अचानक और अप्रत्याशित रूप से मर जाता है। इसकी कोई स्पष्ट वजह नहीं मिलती। यह आमतौर पर नींद के दौरान होता है। यूनिसेफ के अनुसार, एसआईडीएस किसी एक कारण से नहीं बल्कि कई जोखिम कारकों के मिलने से होता है। एसआईडीएस के मुख्य जोखिम कारक पर नजर डालें तो शोध बताते हैं कि एसआईडीएस में तीन प्रकार के कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं- पहला शारीरिक कमजोरी है, समय से पहले जन्मे बच्चे या गर्भावस्था में तंबाकू के धुएं के संपर्क में आए शिशु में जोखिम ज्यादा होता है। दूसरा है सामाजिक कमजोरी यानी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, माता-पिता को सहयोग न मिलना और असुरक्षित रहने की स्थिति। वहीं, तीसरा जोखिम का कारक है सोने का असुरक्षित माहौल। सोने की गलत मुद्रा, ढीले बिस्तर, तकिए, खिलौने या तंबाकू का धुआं आदि। यूनिसेफ बताता है कि एसआईडीएस से होने वाली ज्यादातर मौतें 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं में होती हैं। हालांकि, एक साल तक सावधानी बरतनी चाहिए। यूनिसेफ और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एसआईडीएस को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण उपाय अपनाकर इसके जोखिम को बहुत कम किया जा सकता है- सुरक्षित नींद का एबीसी नियम:- ए – अलोन (अकेला) शिशु को अपने बिस्तर पर अकेला सुलाएं। माता-पिता के साथ सोफे या कुर्सी पर सोना खतरनाक हो सकता है। बी– बैक (पीठ के बल) हमेशा शिशु को पीठ के बल लिटाएं। सी – क्रिब (सुरक्षित बिस्तर) शिशु का बिस्तर साफ, सख्त और सपाट होना चाहिए। उसमें कोई बंपर, तकिया, ढीली चादर, कंबल या खिलौने न रखें। शिशु को पास लेकिन अलग सुलाएं:- पहले छह महीनों तक शिशु को माता-पिता के बेड के पास रखें, लेकिन अलग क्रिब या बास्केट में। इससे एसआईडीएस का खतरा कम होता है और स्तनपान भी आसान होता है। धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें :- गर्भावस्था में और बच्चे के जन्म के बाद घर में किसी को भी धूम्रपान न करने दें। तंबाकू का धुआं एसआईडीएस का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। सही तापमान बनाए रखें :- शिशु को ज्यादा गर्म या ठंडा न रखें। कमरे का तापमान आरामदायक रखें। शिशु को मौसम के अनुसार हल्के कपड़े पहनाएं। अन्य जरूरी सावधानियों में शिशु के सोने की जगह साफ-सुथरी रखें। स्तनपान को बढ़ावा दें। शिशु का नियमित चेकअप करवाते रहें। माता-पिता को यह समझना बेहद जरूरी है कि एसआईडीएस दुर्लभ है, लेकिन सावधानी बरतने से यह और भी कम हो सकता है। सुरक्षित नींद की आदतें न सिर्फ एसआईडीएस बल्कि अन्य खतरों से भी बचाती हैं।
 
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