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आईसीएमआर ने आयोजित किया प्रथम वार्षिक क्लिनिकल ट्रायल सम्मेलन, एकीकृत चिकित्सा अनुसंधान में भारत की बढ़ती भूमिका पर जोर
By Virat baibhav | Publish Date: 21/5/2026 2:52:45 PM
आईसीएमआर ने आयोजित किया प्रथम वार्षिक क्लिनिकल ट्रायल सम्मेलन, एकीकृत चिकित्सा अनुसंधान में भारत की बढ़ती भूमिका पर जोर

नई दिल्ली। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने बुधवार को 'अंतर्राष्ट्रीय नैदानिक परीक्षण दिवस' के अवसर पर 'प्रथम आईसीएमआर वार्षिक क्लिनिकल ट्रायल सम्मेलन 2026' का आयोजन किया। सम्मेलन की थीम 'एकीकृत चिकित्सा नैदानिक परीक्षणों पर फोकस' रही। इस कार्यक्रम में भारत को वैश्विक स्तर पर नैदानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उभरते नेतृत्व के रूप में स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। सम्मेलन में नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और नियामक अधिकारियों ने भाग लिया। प्रो. (डॉ.) वी.के. पॉल, डॉ. राजीव बहल और वैद्य राजेश कोटेचा सहित कई प्रमुख हितधारक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट और दिशानिर्देश जारी किए गए, जिनमें पहला, 'भारत में प्रथम चरण के नैदानिक परीक्षणों को आगे बढ़ाना: नियामक प्रक्रियाओं और अवसरों पर एक डेल्फी अध्ययन' और दूसरा 'भारत में बहुकेंद्रीय अनुसंधान की एकल नैतिक समीक्षा के लिए परिचालन दिशानिर्देश' शामिल है। इन दस्तावेजों का उद्देश्य नैदानिक परीक्षणों को और तेज, पारदर्शी तथा नैतिक रूप से मजबूत बनाना है। सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया पर आईसीएमआर-सीसीआरएएस के बहुकेंद्रीय चरण-3 रेंडोमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के नतीजे थे। इस अध्ययन में पुनर्नवादि मंडुरा और द्राक्षवलेहा जैसी आयुर्वेदिक दवाओं की मानक आयरन-फोलिक एसिड थेरेपी के साथ तुलना की गई। लगभग 4000 गैर-गर्भवती महिलाओं पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि दोनों आयुर्वेदिक औषधियां मानक उपचार के समकक्ष प्रभावी हैं। यह शोध एकीकृत चिकित्सा के क्षेत्र में भारत की मजबूत संभावनाओं को रेखांकित करता है। आईसीएमआर ने कहा कि समय पर नैदानिक परीक्षण, बेहतर नियामक प्रक्रियाएं और नैतिक समीक्षा तंत्र देश में स्वास्थ्य अनुसंधान को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। सम्मेलन में चर्चा हुई कि प्रथम-मानव चरण-1 परीक्षणों को बढ़ावा देने के लिए नियामक प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाए और शोध संस्थानों और उद्योग के बीच समन्वय बढ़ाया जाए। 'एकीकृत अनुसंधान साक्ष्य की नीतिगत स्वीकृति' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने साक्ष्य-आधारित एकीकृत चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने पर जोर दिया।
 
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