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हर्निया से बचाव में मददगार उपविष्ठ कोणासन, साइटिका में भी मिल सकती है राहत
By Virat baibhav | Publish Date: 8/6/2026 2:30:39 PM
हर्निया से बचाव में मददगार उपविष्ठ कोणासन, साइटिका में भी मिल सकती है राहत

नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में शरीर पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे पाचन तंत्र की कमजोरी, मांसपेशियों में जकड़न, कमर दर्द और हर्निया जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। ऐसे में योग को शरीर के प्राकृतिक इलाज के रूप में देखा जाता है। इन्हीं योगासनों में उपविष्ठ कोणासन एक ऐसा आसान आसन है, जो शरीर के निचले हिस्से को फायदा पहुंचाता है और कई समस्याओं में राहत देता है।   उपविष्ठ कोणासन मुख्य रूप से शरीर के अंदरूनी हिस्सों, खासकर हैमस्ट्रिंग, पेल्विक क्षेत्र, पेट और रीढ़ की हड्डी पर काम करता है। इस आसन को करते वक्त शरीर को धीरे-धीरे फैलाकर आगे की ओर झुकाया जाता है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव आता है। यह खिंचाव शरीर की जकड़न को कम करता है और अंदरूनी रक्त संचार को बेहतर बनाता है। ये उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं। इस आसन का सबसे बड़ा लाभ हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ाना है। हैमस्ट्रिंग शरीर के पिछले हिस्से की बड़ी मांसपेशियां होती हैं, जो जांघों के पीछे स्थित होती हैं। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक बैठा रहता है या कम चलता है, तो ये मांसपेशियां धीरे-धीरे सख्त हो जाती हैं। उपविष्ठ कोणासन में जब पैरों को फैलाकर आगे झुकते हैं, तो इन मांसपेशियों पर धीरे-धीरे खिंचाव आता है। यह खिंचाव मांसपेशियों को ढीला और लचीला बनाता है, जिससे चलने-फिरने में आसानी होती है और शरीर का संतुलन बेहतर होता है। इसके अलावा, यह पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार को बेहतर करना है। पेल्विक क्षेत्र शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां कई अंदरूनी अंग स्थित होते हैं। इस आसन के दौरान जब शरीर आगे की ओर झुकता है, तो इस क्षेत्र में हल्का दबाव और खिंचाव बनता है, जिससे रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। बेहतर रक्त संचार से अंग ज्यादा सक्रिय और स्वस्थ रहते हैं, जिससे कई अंदरूनी समस्याओं की संभावना कम हो जाती है। उपविष्ठ कोणासन को हर्निया की रोकथाम में भी सहायक माना जाता है। हर्निया तब होता है जब पेट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और अंदरूनी अंग अपनी सामान्य जगह से बाहर की ओर दबाव डालने लगते हैं। यह आसन पेट और पेल्विक मांसपेशियों को मजबूत करता है। जब मांसपेशियां मजबूत होती हैं, तो वे अंदरूनी अंगों को सही जगह पर बनाए रखने में मदद करती हैं। साइटिका दर्द में राहत देने के लिए भी यह आसन उपयोगी है। साइटिका दर्द अक्सर कमर से शुरू होकर पैरों तक जाता है, और यह नसों पर दबाव के कारण होता है। उपविष्ठ कोणासन में जब शरीर आगे झुकता है और पैरों में खिंचाव आता है, तो यह दबाव धीरे-धीरे कम करने में मदद करता है। इससे नसों पर तनाव घटता है और दर्द में राहत महसूस हो सकती है। मासिक धर्म को नियमित करने में भी यह योगासन मददगार माना जाता है। जब पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियां संतुलित होती हैं, तो शरीर का हार्मोनल संतुलन भी बेहतर होता है। यही संतुलन मासिक धर्म चक्र को नियमित करने में भूमिका निभाता है। इसके साथ ही यह दर्द और ऐंठन को भी कम करने में सहायक हो सकता है।
 
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