Wednesday,15 July 2026,07:12 AM
ब्रेकिंग न्यूज़
वनडे सीरीज: गिल की कप्तानी पारी, इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर भारत ने सीरीज में बनाई लीडज स्‍ट्रेट में जहाजों से 20 प्रत‍िशत टोल वसूली के फैसले पर ट्रंप का यूटर्न, अब समझाया नया 'बिजनेस प्लान'भारत और स्पेन ने आपूर्ति श्रृंखलाओं और औद्योगिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए सहयोग पर की चर्चाहोर्मुज स्ट्रेट में भारतीय क्रू मेंबर की मौत पर भारत सख्त, ईरान के सामने उठाया सुरक्षा का मुद्दा: विदेश मंत्रालयहोर्मुज स्ट्रेट में भारतीय क्रू मेंबर की मौत पर भारत सख्त, ईरान के सामने उठाया सुरक्षा का मुद्दा: विदेश मंत्रालयहोर्मुज स्‍ट्रेट तनाव: अमेरिका ने ईरान जाने वाले जहाजों को दी चेतावनी, बंदरगाहों से दूर रहने को कहाबांकीपुर उपचुनाव: भाजपा ने 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की, नितिन नवीन से लेकर सम्राट चौधरी तक करेंगे प्रचारपश्चिम एशिया तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर भारत ने बढ़ाया फोकस: विदेश मंत्रालय
लाइफस्टाइल
रक्तदान को लेकर मिथक बन रहे रुकावट, जानें क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट
By Virat baibhav | Publish Date: 15/6/2026 3:14:15 PM
रक्तदान को लेकर मिथक बन रहे रुकावट, जानें क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट

नई दिल्ली। हर साल 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूक करना और स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना है। रक्तदान को हमेशा 'महादान' कहा गया है, क्योंकि एक व्यक्ति द्वारा दिया गया रक्त कई जरूरतमंद मरीजों की जान बचा सकता है। इसके बावजूद आज भी बड़ी संख्या में लोग रक्तदान करने से हिचकिचाते हैं।  स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रक्तदान को लेकर समाज में कई तरह की गलत धारणाएं और भ्रांतियां फैली हुई हैं, जो लोगों को इस बड़े काम से दूर रखती हैं। सबसे आम गलतफहमी यह है कि रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है या लंबे समय तक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। डॉक्टर्स का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह गलत है। वास्तव में एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रक्तदान एक सुरक्षित प्रक्रिया है और शरीर कुछ ही समय में रक्त की पूर्ति कर लेता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) भी लोगों से लगातार अपील कर रहा है कि वे इन भ्रांतियों से बाहर निकलकर स्वैच्छिक रक्तदान को अपनाएं। एनएचएम के अनुसार, यदि अधिक लोग नियमित रूप से रक्तदान करें तो देश में रक्त की कमी की समस्या काफी हद तक दूर की जा सकती है। एक यूनिट रक्त कई मरीजों के इलाज में उपयोगी साबित होता है, खासकर दुर्घटनाओं, सर्जरी और प्रसव जैसी आपात स्थितियों में। विशेषज्ञ बताते हैं कि रक्तदान से पहले डोनर की पूरी स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसमें हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर और सामान्य स्वास्थ्य की जांच शामिल होती है। केवल वही व्यक्ति रक्तदान कर सकता है जो पूरी तरह स्वस्थ हो। 18 से 65 वर्ष की आयु के लोग इस प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं, बशर्ते उनका हीमोग्लोबिन कम से कम 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो। डॉक्टर्स के अनुसार, पुरुष हर तीन महीने में और महिलाएं हर चार महीने में रक्तदान कर सकती हैं। पूरी प्रक्रिया केवल कुछ मिनटों की होती है और इसका शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, यह शरीर में नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण को भी प्रोत्साहित करता है। स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न संस्थान लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोग इस सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग सही जानकारी प्राप्त करें और गलत धारणाओं को छोड़ दें तो देश में रक्त की उपलब्धता की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है।
 
COPYRIGHT @ 2016 VIRAT VAIBHAV. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS