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झारखंड में 30 दिनों में स्वाइन फ्लू के 36 मामले, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
By Virat baibhav | Publish Date: 2/9/2026 3:35:32 PM
झारखंड में 30 दिनों में स्वाइन फ्लू के 36 मामले,  स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

रांची। झारखंड मे स्वाइन फ्लू एच1एन1 संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य महकमे की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 30 दिनों में राज्यभर से एच1एन1 संक्रमण के कुल 36 मामले सामने आए हैं। चिंताजनक बात यह है कि कुल मरीजों में से आधे यानी 18 मरीज बच्चे और किशोर हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और राज्य के सभी प्रमुख अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।   स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दूसरे राज्यों से यात्रा कर झारखंड लौटने वाले लोगों के कारण भी संक्रमण का प्रसार देखा जा रहा है। दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान में मौसमी फ्लू के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए झारखंड में भी अंतरराज्यीय आवाजाही पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों और अंतरराज्यीय बस स्टैंडों जैसे उच्च आवाजाही वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के साथ ही जिला स्तर से रोजाना रिपोर्ट तलब की जा रही है।  राज्य में संक्रमण की सटीक पहचान के लिए रांची स्थित रिम्स और जमशेदपुर स्थित एमजीएम) में एच1एन1 तथा एच3एन2 वायरस की जांच की आधुनिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। राज्य स्वास्थ्य निदेशालय ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को संदिग्ध मरीजों की त्वरित पहचान, जांच और समुचित इलाज सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। राज्य के तमाम मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और सदर अस्पतालों में कम से कम 10-10 अतिरिक्त बेड आरक्षित रखने का आदेश दिया गया है।  इसके अलावा, अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन सप्लाई, आवश्यक दवाइयों का स्टॉक, आईसीयू , एचडीयू तथा विशेषज्ञ डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की 24 घंटे उपलब्धता अनिवार्य कर दी गई है। विभाग द्वारा इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षणों वाली बीमारियों और गंभीर श्वसन संक्रमण के मामलों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। रिम्स के क्रिटिकल केयर विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि एच1एन1 एक इन्फ्लुएंजा वायरस है, जिसे लेकर पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है।  हालांकि, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त मरीजों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। चिकित्सकों के मुताबिक तेज बुखार, ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, शरीर दर्द और बच्चों में उल्टी-दस्त इसके प्रमुख लक्षण हैं। लक्षण दिखने पर खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और समय पर इलाज से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं। 
 
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