नई दिल्ली। अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। कई बार शुरुआती लक्षणों को लोग बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, याददाश्त या व्यवहार में लगातार बदलाव दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर पहचान होने से आगे की देखभाल और जरूरी सहायता की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है। अल्जाइमर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। इस दिन लोगों को बीमारी के शुरुआती संकेतों को पहचानने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए जागरूक किया जाता है।
इन बदलावों पर दें ध्यान
अल्जाइमर और डिमेंशिया के शुरुआती संकेत हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि, कुछ सामान्य बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। व्यक्ति को समय या जगह को लेकर भ्रम होने लगना, रोजमर्रा की योजना बनाने या किसी समस्या को हल करने में परेशानी होना और पहले आसानी से किए जाने वाले परिचित कामों को करने में कठिनाई होना इसके संकेत हो सकते हैं। इसी तरह ऐसी याददाश्त की कमी, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। कुछ लोग काम या सामाजिक गतिविधियों से धीरे-धीरे दूरी बनाने लगते हैं। ऐसे बदलावों को केवल उम्र का असर मानने के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
शारीरिक और मानसिक रूप से रहें सक्रिय
अल्जाइमर के जोखिम को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। रोजाना टहलना, योग या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य व्यायाम शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकते हैं। इसके साथ ही दोस्तों और परिवार के साथ सामाजिक जुड़ाव बनाए रखना भी जरूरी है। बातचीत करना, लोगों से मिलना-जुलना और सामूहिक गतिविधियों में शामिल होना व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक रूप से सक्रिय रखने में मदद कर सकता है।
संतुलित आहार और अच्छी नींद जरूरी
खाने में फल और सब्जियों सहित संतुलित और पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दें। पर्याप्त पानी पीना और नियमित रूप से पर्याप्त नींद लेना भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है। कोशिश करें कि सोने और जागने का समय लगभग तय रहे।
दिमाग को सक्रिय रखें
मानसिक सक्रियता बनाए रखने के लिए नई चीजें सीखते रहना भी उपयोगी हो सकता है। किताब पढ़ना, कोई नया कौशल सीखना, संगीत सुनना या रचनात्मक गतिविधियों में रुचि लेना जैसे काम रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। ऐसी गतिविधियों के लिए भी समय निकालना चाहिए, जिनसे खुशी और संतुष्टि मिलती हो। अगर किसी व्यक्ति में याददाश्त, सोचने-समझने या रोजमर्रा के काम करने की क्षमता में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है, तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।