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सरकार 25 करोड़ लोगों को दे रही ईएसआईसी हेल्थ सिक्योरिटी : डॉ. मनसुख मांडविया
श्रम मंत्री ने सामाजिक सुरक्षा और कल्याण कार्यक्रमों का किया जिक्र
By Viraat Vaibhav | Publish Date: 28/9/2026 2:37:57 PM
सरकार 25 करोड़ लोगों को दे रही ईएसआईसी हेल्थ सिक्योरिटी : डॉ. मनसुख मांडविया

औद्योगिक संबंध और श्रम एवं पुरस्कार 2026'' पर सीआईआई-ईएफआई राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया।

नई दिल्ली । केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को कहा कि भारत 'कर्मचारी राज्य बीमा निगम' (ईएसआईसी) के जरिए 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा दे रहा है। उन्होंने सरकार के सामाजिक सुरक्षा और कल्याण कार्यक्रमों का भी जिक्र किया।

80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज

'औद्योगिक संबंध और श्रम एवं पुरस्कार 2026' पर सीआईआई-ईएफआई राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, मांडविया ने कहा कि सरकार 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज भी उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि 10 करोड़ किसानों को हर चार महीने में उनके बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपए मिलते हैं। मंत्री ने कहा, "आज देश में 10 ऐसे राज्य हैं जो महिलाओं के खातों में हर महीने 2,000 रुपए, 1,500 रुपए या 1,200 रुपए जैसी रकम जमा करते हैं।"

औद्योगिक संबंधों पर भारत का दृष्टिकोण

केंद्रीय मंत्री ने औद्योगिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय श्रम तौर-तरीकों एवं भारत की अपनी परंपराओं और प्रणालियों के बीच संतुलन पर बात करते हुए कहा, "जब हम औद्योगिक संबंधों की बात करते हैं... तो एक तरफ आईएलओ के अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीके और अंतरराष्ट्रीय ढांचे होते हैं, और दूसरी तरफ भारत की अपनी परंपराएं और संबंध; तो मुझे यह थोड़ा अलग लगता है।" मांडविया ने कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में कई मंत्रालयों में मंत्री के तौर पर काम करने के उनके अनुभव ने उन्हें भारत और विदेशों में विभिन्न मंचों और हितधारकों के साथ जुड़ने का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक संबंधों के प्रति भारत के दृष्टिकोण में अंतरराष्ट्रीय ढांचे और देश के अपने सामाजिक और आर्थिक संदर्भ, दोनों को ध्यान में रखने की जरूरत है।

सेस फंड और श्रम संहिताओं के आकलन पर जोर

इससे पहले सितंबर में, मंत्री ने राज्य सरकारों से कहा था कि वे सेस फंड के मौजूदा इस्तेमाल का विस्तृत आकलन करें, कमियों की पहचान करें और श्रमिकों के दीर्घकालिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनके प्रभावी इस्तेमाल के नए तरीके खोजें। मंत्री ने राज्यों से आगे कहा कि वे श्रम संहिताओं के लागू होने के एक साल बाद उनके असर का व्यापक आकलन करें और उन क्षेत्रों की पहचान करें जहां उन्हें और बेहतर ढंग से लागू करने की जरूरत हो सकती है।

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