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आईसीयू से वेंटिलेटर पर पहुंची दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था: देवेंद्र यादव
By Virat baibhav | Publish Date: 26/9/2025 9:07:17 PM
नई दिल्ली। देश की राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जताते हुए शुक्रवार को कांग्रेस दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था आईसीयू से वेंटिलेटर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों सहित दिल्ली नगर निगम के अस्पतालों में मरीजों को व्यवस्थाओं की कमी के कारण विभिन्न समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है। हिन्दूराव अस्पताल, बालक राम अस्पताल, स्वामी दयानन्द अस्पताल में दवाओं की कमी के कारण मरीजों को बाहर से ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। सरकार के अस्पतालों में मरीजों की जेब पर इलाज का खर्च भारी पड़ रहा है। यादव ने कहा कि भाजपा शासित निगम के अस्पतालों में व्यवस्था इतनी चरमराई हुई है कि बीपी, एंटीबायटिक, हृदय रोग जैसे रोगों की दवाएं तक नहीं मिल रही है। लंबी-लंबी लाइनों में लगने के बाद मरीज को डॉक्टर दवाई तो लिखकर दे रहे हैं लेकिन अस्पताल में दवाई उपलब्ध नहीं है। मरीजों को बाहर से दवाई खरीदनी पड़ रही है। उन्होंने का कि मानसून के बाद गंदगी और जल जनित बीमारियों डेंगू, मलेरिया के केस बढ़ रहे हैं लेकिन यहां मरीजों के इलाज का कोई खास इंतजाम नहीं है। दिल्ली के इन अस्पतालों मे मरीज कई महीनों से दवाओं की कमी से जूझ रहे हंै, केवल एक या दो दवाएं ही मिलती है और महंगी दवाई मरीजों को दोगुने दामों में खरीदनी पड़ रही है। सूत्रों के अनुसार निगम अस्पतालों में यह स्थिति पिछले चार महीनों से बनी हुई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मरीजों की शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। अस्पतालों में दवाई वितरण केंद्रों में भारी अव्यवस्था है, काउंटर अचानक बंद करने मरीजों को खासी परेशानी हो रही है। निगम के अस्पतालों के साथ-साथ डिस्पेंसरियां की स्थिति भी खराब है। स्वास्थ्य संबधी व्यवस्थाओं की हालत बदतर होने के साथ इनकी इमारतों की जर्जर हालत, खराब बुनियादी ढांचे, कर्मचारियों की अनुपलब्धता और मशीनां के खरब होने जैसी समस्याएं भी शामिल है। कुछ अस्पताल तो खतरनाक घोषित होने के बावजूद संचालित हो रहे है। यही नहीं दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार के सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत सफाई अभियान की निगम अस्पतालों में गंदगी के ढ़ेर पड़े हैं। देवेंद्र यादव ने कहा कि निगम अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों, अन्य कर्मचारियों की भारी कमी है, रेडियोलॉजी की ज्यादातर मशीने खराब हैं, लैब बंद रहते हैं, टेस्टों के लिए मरीजों को घंटे इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। भारी फंड की कमी के कारण निगम अस्पतालों में व्यवस्था ध्वस्त है और दवाई, टेस्ट और कर्मचारियों की भारी कमी से मरीजों को जूझना पड़ रहा है। प्रशासन निगम अस्पतालों में शिकायत के बाद दवाएं उपलब्ध कराने के लिए उचित कार्यवाही करने का आश्वासन तो दे रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार की गिरफ्त में निगम फंड की कमी के कारण दिल्ली के लोगों को परेशानी और व्यवस्था की खस्ताहाल और बदहाली को सुधारने के लिए कोई काम नहीं कर रहे हैं।
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