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नेचुरल एनर्जी बूस्टर: गर्मियों में शरीर को अंदर से ठंडक देकर कमजोरी दूर करता है ये खट्टा-मीठा फल
By Virat baibhav | Publish Date: 14/4/2026 3:57:57 PM
नेचुरल एनर्जी बूस्टर: गर्मियों में शरीर को अंदर से ठंडक देकर कमजोरी दूर करता है ये खट्टा-मीठा फल

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही थकान, लू और एनर्जी की कमी आम समस्या बन जाती है। ऐसे में बाजार में एक खास फल दिखने लगता है जो प्राकृतिक रूप से शरीर को ठंडक और ताजगी देता है। यह खट्टे-मीठे स्वाद वाला फल फालसा है, जो न सिर्फ प्यास बुझाता है बल्कि शरीर की कमजोरी भी दूर करता है। गर्मियों में फालसा का सेवन न सिर्फ लू और गर्मी से बचाता है, बल्कि पाचन, डायबिटीज, दिल की सेहत और इम्युनिटी को भी मजबूत बनाता है। फालसा का वैज्ञानिक नाम ग्रेविया एशियाटिका है। यह भारत के शुष्क और अद्र्धशुष्क इलाकों जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ साइंस के अनुसार, फालसा में विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन और भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। इसमें कैलोरी और फैट बहुत कम होते हैं। मैग्नीशियम, पोटेशियम, सोडियम और प्रोटीन भी मौजूद रहते हैं। ये सभी तत्व मिलकर फालसा को एक शक्तिशाली इम्युनिटी बूस्टर बनाते हैं। गर्मियों में फालसा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर को अंदर से ठंडक देता है, लू लगने से बचाता है और पसीने के कारण होने वाली कमजोरी को दूर करता है। इसका रस एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करता है। इसका शरबत पीने से एनर्जी भी मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार, खून की कमी या एनीमिया में पके फालसे का सेवन लाभकारी है। त्वचा की जलन, पेट में जलन, पित्त विकार, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और पाचन संबंधी समस्याओं में भी यह रामबाण साबित होता है। फालसा पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, कब्ज और दस्त दोनों को नियंत्रित करता है। यह तन मन दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण यह कई गंभीर रोगों से बचाव में भी सहायक होता है। खास बात है कि फालसा को ताजा खाया जा सकता है, इसका जूस बनाया जा सकता है या चाट-सलाद में भी डाला जा सकता है। इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है, इसलिए कुछ लोगों को ज्यादा मात्रा में खाने से एलर्जी या पेट की हल्की परेशानी हो सकती है, इसलिए पहले थोड़ी मात्रा में आजमाएं और जरूरत पडऩे पर डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लें।
 
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