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हृदय और फेफड़ों को मजबूत बनाने में मददगार है अंजलि मुद्रा, जानिए कैसे करती है शरीर पर असर
By Virat baibhav | Publish Date: 25/4/2026 5:06:29 PM
हृदय और फेफड़ों को मजबूत बनाने में मददगार है अंजलि मुद्रा, जानिए कैसे करती है शरीर पर असर

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और बिगड़ती जीवनशैली का असर सबसे ज्यादा हमारे दिल और फेफड़ों पर पड़ रहा है। लगातार बढ़ता मानसिक दबाव, घंटों बैठकर काम करना, प्रदूषण और अनियमित दिनचर्या धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बना देती है।   ऐसे में लोग खुद को स्वस्थ रखने के लिए योग को अपना रहे हैं। इन्हीं में से एक है अंजलि मुद्रा, जिसे आमतौर पर नमस्ते मुद्रा या प्रार्थना मुद्रा भी कहा जाता है। यह मुद्रा शरीर, मन और सांसों के बीच संतुलन बनाने का काम करती है। अंजलि मुद्रा में दोनों हथेलियों को जोड़ा जाता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, जब दोनों हथेलियां आपस में जुड़ती हैं, तब शरीर और मस्तिष्क के बीच एक संतुलन बनने लगता है। इससे मन शांत होता है और सांसों की गति धीरे-धीरे नियंत्रित होने लगती है। यही प्रक्रिया दिल और फेफड़ों को फायदा पहुंचाने में मदद करती है। अंजलि मुद्रा करते समय जब व्यक्ति गहरी और धीमी सांस लेता है, तब फेफड़ों तक ऑक्सीजन बेहतर तरीके से पहुंचती है। इससे सांस लेने की प्रक्रिया संतुलित होती है और फेफड़े ज्यादा सक्रिय तरीके से काम करने लगते हैं। लगातार अभ्यास करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है। जो लोग जल्दी थकान महसूस करते हैं या तनाव के कारण तेज सांस लेने की समस्या से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह मुद्रा काफी लाभकारी मानी जाती है। धीमी और गहरी सांसें शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बेहतर बनाने में मदद करती हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। अंजलि मुद्रा का असर हृदय पर भी सकारात्मक माना जाता है। यह मुद्रा सीने के बीच वाले हिस्से यानी हार्ट चक्र पर ध्यान केंद्रित करती है। जब व्यक्ति शांत मन से इस मुद्रा का अभ्यास करता है, तो तनाव कम होने लगता है। तनाव कम होने का सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ता है, क्योंकि अत्यधिक तनाव दिल की धड़कनों और रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है अंजलि मुद्रा मन को शांत करके दिल पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को कम करने में मदद करती है। इसके अलावा अंजलि मुद्रा मस्तिष्क के दोनों हिस्सों के बीच संतुलन बनाने में भी मदद करती है। इससे एकाग्रता बढ़ती है और सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है। शारीरिक रूप से भी यह मुद्रा फायदेमंद मानी जाती है। इससे हाथों, कलाई और बांहों की मांसपेशियों में लचीलापन आता है। लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करने वाले लोगों के लिए यह हल्का अभ्यास राहत देने वाला हो सकता है। साथ ही यह शरीर को भीतर से शांत करने का काम भी करता है।
 
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