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उपराज्यपाल ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया
By Virat baibhav | Publish Date: 1/9/2026 7:53:21 PM
नई दिल्ली। उपराज्यपाल दिल्ली सरदार तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा आईआईटी दिल्ली के सहयोग से इंडिया इंटरनेशनल सेंटर नई दिल्ली में आयोजित नगर निगम ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर एक दिवसीय मंथन कार्यशाला सर्कुलैरिटी की दिशा में बहु-स्तरीय बहु-हितधारक रणनीति का उद्घाटन किया। इस अवसर पर दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव,एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार, अपर आयुक्त अरुण कुमार मिश्रा, निगम पार्षदगण, आईआईटी दिल्ली एवं अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र के विशेषज्ञ, एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारी अभियंता एवं कर्मचारी उपस्थित थे। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में विशेषज्ञों जनप्रतिनिधियों और विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने के लिए एमसीडी और आईआईटी दिल्ली को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ज्ञान साझा करने से निरंतर बढ़ता है और दिल्ली की अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए देश और दुनिया भर की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों तथा सफल मॉडलों से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने इंदौर को देश का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि अनुशासित और निरंतर प्रयासों से किस प्रकार उल्लेखनीय परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने इंदौर के सफल मॉडल का गहन अध्ययन कर दिल्ली के आकार जनसंख्या घनत्व और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इसे अपनाने पर बल दिया। उपराज्यपाल ने कहा कि नगर निगम के ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक और सतत प्रबंधन केवल स्वच्छता का विषय नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और दिल्लीवासियों के जीवन की गुणवत्ता से भी सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 13 हजार मीट्रिक टन नगर निगम अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसके प्रभावी प्रबंधन के लिए आधुनिक, टिकाऊ और व्यावहारिक समाधानों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल कचरा संग्रहण तक सीमित रहने के बजाय अपशिष्ट को कम करने पुन उपयोग करने, पुनर्चक्रण करने तथा इसे मूल्यवान संसाधनों में परिवर्तित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उपराज्यपाल ने कहा कि प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए सामूहिक जिम्मेदारी और सक्रिय जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। नगर निकायों जनप्रतिनिधियों आरडब्ल्यूए बाजार संघों उद्योगों संस्थानों विशेषज्ञों और नागरिकों को मिलकर स्थायी बदलाव लाने के लिए कार्य करना होगा। प्रत्येक परिवार को स्वच्छता में एक समान हितधारक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और स्वच्छता को केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं समझना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला में होने वाले विचार-विमर्श से व्यावहारिक एवं नवाचारपूर्ण समाधान ठोस कार्ययोजनाएं और मापनीय परिणाम सामने आएंगे जिससे दिल्ली के लिए एक टिकाऊ और दीर्घकालिक अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल विकसित किया जा सकेगा जो भारत और विश्व के अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण बन सके। दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने कहा कि दिल्ली की स्वच्छता एक सामूहिक जिम्मेदारी है और स्वच्छ, स्वस्थ एवं बेहतर शहर के निर्माण के लिए इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने हाल के वर्षों में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए लैंडफिल स्थलों को साफ करने स्वच्छता अवसंरचना को मजबूत बनाने तथा नई मशीनरी की तैनाती जैसे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रभावी और सख्त प्रवर्तन के महत्व पर भी जोर दिया तथा कहा कि चयनित वार्डों को स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को प्रदर्शित करने वाले मॉडल वार्ड के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। महापौर ने कहा कि दिल्ली को अपने स्वच्छता लक्ष्यों को प्राप्त करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है लेकिन सुधार की अपार संभावनाएं भी मौजूद हैं। केंद्रित प्रयासों प्रभावी निगरानी जनभागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से इन चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर पूरे शहर में स्पष्ट और स्थायी सुधार लाया जा सकता है। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान ने देश में स्वच्छता और सफाई के प्रयासों को एक मजबूत दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि इंदौर एक अग्रणी उदाहरण के रूप में उभरा है, जिसने यह प्रदर्शित किया है कि निरंतर और केंद्रित प्रयासों से किसी शहर में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता आज शहरी विकास और जीवन की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण मानक बन चुकी है।