नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा शासित एमसीडी बजट को दिल्ली की जनता के साथ धोखा बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा की स्थायी समिति के अध्यक्ष ने एमसीडी सदन में जो बजट पेश किया है, वो पूरी तरह कागजी,दिखावटी और हवा-हवाई है। वायु प्रदूषण, सफाई, कूड़ा प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बच्चों व स्वच्छता कर्मियों के लिए न कोई विजन और न ठोस कोई ठोस कार्य योजना है। उन्होंने कहा कि एमसीडी की डिस्पेंसरियों पर आरोग्य मंदिर का बोर्ड लगा भाजपा वाहवाही लूट रही है। एमसीडी के अस्पताल भी बदहाल हैं। कच्चे सफाई कर्मचारियों को पक्का करने का दावा भी जुमला निकल गया। बजट में एमटीएस कर्मचारियों के लिए फूटी कौड़ी नहीं दिया गया है। मंगलवार को एमसीडी सदन में बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि यह बजट नहीं बल्कि आंकड़ों का ऐसा जादूगरखाना है, जहां सच गायब है और केवल भ्रम दिखाया जा रहा है। जिसे भाजपा दूरदर्शिता और प्रशासनिक सुधार बता रही है, वह असल में डर का प्रोजेक्ट था। उन्होंने पूछा कि अगर यह इतना जरूरी था तो 2017 या 2012 में जब भाजपा आराम से जीत रही थी तब यह फैसला क्यों नहीं लिया गया। अंकुश नारंग ने कहा कि कभी परिसीमन तो कभी नोटिफिकेशन के नाम पर नगर निगम चुनाव नहीं टाले गए बल्कि जनता का हक टाला गया और यह सब देश के गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर हुआ। 2022 की हार के बाद वार्ड कमेटी के चुनाव में डीसी को सभापति बनाया गया और चेयरमैन बनने के बाद भी डिप्टी चेयरमैन का चुनाव डीसी से कराया गया। पार्षदों को सिर्फ शपथ लेने का शो-पीस बना दिया गया है। मेयर की कुर्सी का अपमान तब हुआ जब अतिरिक्त आयुक्त को मेयर की कुर्सी पर बैठाकर स्टैंडिंग कमेटी सदस्य का चुनाव कराया गया। जून 2025 में पीतमपुरा के एमसीडी कम्युनिटी सेंटर के स्विमिंग पूल में 6 साल के बच्चे तक्श राठी की डूबकर हुई मौत का जिक्र करते हुए अंकुश नारंग ने कहा कि पूरे बजट में लाइफ गार्ड, सीसीटीवी, इमरजेंसी सिस्टम और सेफ्टी ऑडिट के लिए कोई फंड या समर्पित प्रावधान नहीं है,लेकिन इवेंट, बैनर, फोटो और प्रचार के लिए पैसा है। बच्चे डूब जाएं पर भाजपा के पोस्टर सूखे नहीं रहने चाहिए यही इनका बजट मॉडल है। हर एमसीडी स्विमिंग पूल में प्रशिक्षित लाइफ गार्ड, सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी रेस्क्यू सिस्टम और नियमित सेफ्टी ऑडिट के लिए सदन से ही अभी डेडिकेटेड बजट आवंटित किया जाए। बजट के आंकड़ों पर बात करते हुए अंकुश नारंग ने बताया कि आरबीई 2025-26 में 1,48,393 लाख रुपये के मुकाबले बीई 2026-27 में 85,847 लाख रुपये का प्रावधान है जो 42 फीसद की गिरावट है। यह पैसा कहां गया और किस मद में खर्च हुआ, इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। आय बढ़ी है लेकिन यह प्रॉपर्टी टैक्स, पेनल्टी और छोटे व्यापारियों पर बोझ डालकर बढ़ाई गई है जबकि एलटीईआर के तहत सरकारी विभागों से 12,000 करोड़ रुपये आज भी बकाया हैं।स्थायी समिति अध्यक्षा के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि 2018 में भाजपा शासित एमसीडी और एलजी के नोटिफिकेशन के जरिए जनता पर यूजर चार्ज थोपा गया था। आम आदमी पार्टी ने सडक़ से लेकर सदन तक संघर्ष किया तब जाकर यह चार्ज हटा।