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भारत का मेडिकल-डिवाइस सेक्टर एक क्षेत्रीय इनोवेशन हब के तौर पर उभर रहा : रिपोर्ट
By Virat baibhav | Publish Date: 8/7/2026 4:32:08 PM
भारत का मेडिकल-डिवाइस सेक्टर एक क्षेत्रीय इनोवेशन हब के तौर पर उभर रहा : रिपोर्ट

नई दिल्ली। भारत का मेडिकल-डिवाइस सेक्टर एक क्षेत्रीय इनोवेशन हब के तौर पर उभर रहा है, जिसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 'एक्सेस-लेड इनोवेटर' के तौर पर पहचाना जा रहा है। साथ ही, वित्त वर्ष 2025 में देश का मेडिकल-डिवाइस निर्यात 4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।  बेन एंड कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 125 से अधिक देशों को मेडिकल डिवाइस निर्यात करता है और देश में हाई-एंड मेडिकल डिवाइस का आयात 5.5 अरब डॉलर का रहा, जो इनोवेशन के लिए अगले मौके की ओर इशारा करता है। यह रिपोर्ट एजेंसी फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च, एंटरप्राइज सिंगापुर, जेपी मॉर्गन, एसजी ग्रोथ कैपिटल और सिंगापुर इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड की साझेदारी में तैयार की गई थी। एशिया-पैसिफिक क्षेत्र, जिसमें भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार शामिल हैं, दुनिया के सबसे अहम मांग केंद्रों में से एक बन रहा है। उम्मीद है कि 2030 तक ग्लोबल मेडटेक डिमांड में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 132 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी, जो सालाना 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, यह ग्लोबल मार्केट की ग्रोथ रेट से अधिक है। जैसे-जैसे डिमांड और इनोवेशन की क्षमताएं बढ़ रही हैं, एशिया-प्रशांत मेडटेक की ग्रोथ का अगला चरण न सिर्फ इनोवेशन पर, बल्कि क्लिनिकल एविडेंस जुटाने, रेगुलेटरी स्ट्रैटेजी, कमर्शियलाइजेशन और मार्केट तक पहुंच बनाने जैसी क्षमताओं को मजबूत करने पर भी निर्भर करेगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि कम संसाधनों वाले हेल्थकेयर सिस्टम के लिए बनाए गए समाधानों को दुनिया भर में तेजी से अपनाया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में मेडिकल डिवाइस का निर्यात 4 अरब डॉलर तक पहुंचने के साथ, भारतीय कंपनियां यह दिखा रही हैं कि कम कीमत और बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता से ग्लोबल लेवल पर भी मुकाबला किया जा सकता है। बेन एंड कंपनी के भारत में हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज प्रैक्टिस के पार्टनर और हेड, ध्रुव सुखरानी ने कहा, "जैसे-जैसे देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है, हेल्थकेयर की मांग अगले कुछ वर्षों में लगभग 10-12 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़कर 320 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है, जिससे मेडिकल टेक्नोलॉजी के लिए जबरदस्त तेजी आएगी।" सुखरानी ने आगे कहा, "हालांकि, विकास का अगला चरण सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग के पैमाने से तय नहीं होगा, बल्कि मजबूत क्लिनिकल सबूतों, रेगुलेटरी क्षमताओं और कमर्शियलाइजेशन के जरिए ग्लोबल लेवल पर मुकाबला करने लायक इनोवेशन बनाने की भारत की क्षमता से तय होगा।"
 
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