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रीढ़ को लचीला बनाता है तिर्यक ताड़ासन, जानें करने के सही तरीके और फायदे
By Virat baibhav | Publish Date: 27/8/2026 3:36:08 PM
रीढ़ को लचीला बनाता है तिर्यक ताड़ासन, जानें करने के सही तरीके और फायदे

नई दिल्ली। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खानपान की वजह से कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। ऐसे में खुद को तरोताजा और फिट रखने के लिए योग से बेहतर कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इन्हीं आसनों में से एक है तिर्यक ताड़ासन, जो पेट और कमर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। आयुष मंत्रालय और योग संस्थानों के दिशा-निर्देशों के अनुसार, तिर्यक ताड़ासन (झूलते ताड़ के पेड़ की मुद्रा) शरीर को लचीला बनाने और संतुलन सुधारने का एक बेहतरीन योगासन है। यह एक आसान और प्रभावी खड़े होकर किया जाने वाला आसन है, जिसमें शरीर को साइड की ओर झुकाया जाता है। इस आसन में सजगता बहुत जरूरी है। तिर्यक ताड़ासन के अभ्यास के लिए, सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में खड़े होकर पैरों को कंधों की चौड़ाई जितना अलग रखें, शरीर सीधा और हाथ नीचे रखें। सांस भरते हुए, दोनों हाथों की उंगलियां इंटरलॉक करें, हथेलियां ऊपर करके सिर के ऊपर सीधे उठाएं और कोहनियां सीधी रखें। इस दौरान, सांस छोड़ते हुए कमर से बाईं या दाईं ओर धीरे झुकें। इस पोज में 10 से 30 सेकंड तक रुकें और सामान्य तरीके से सांस लेते रहें। यह 3 से 5 बार कर सकते हैं। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, कमर दर्द और साइड में जकड़न को कम करता है। पेट और आंतों की मालिश होती है, जिससे पाचन क्रिया सुधरती है और कब्ज दूर होता है। बगल, कंधे, छाती और हाथों की मांसपेशियां स्ट्रेच होने के साथ मजबूत भी होती हैं। फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, सांस लेना आसान होता है। संतुलन और एकाग्रता में सुधार आता है, तनाव कम होता है। शरीर की एनर्जी बढ़ती है। नियमित अभ्यास से कमर की चर्बी घटती है। हालांकि, आयुष मंत्रालय ने कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी हैं। उनके अनुसार, जिन लोगों को पीठ, रीढ़ की हड्डी या पेट में चोट लगी हो, उन्हें यह आसन करने से बचना चाहिए। साथ ही, गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए।
 
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