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भारत-पाक संघर्ष: केंद्र ने सेना प्रमुख को प्रादेशिक सेना का सहयोग लेने के लिए अधिकृत किया
By Virat baibhav | Publish Date: 9/5/2025 4:32:03 PM
भारत-पाक संघर्ष: केंद्र ने सेना प्रमुख को प्रादेशिक सेना का सहयोग लेने के लिए अधिकृत किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सेना प्रमुख को अधिकार दिया है कि वह नियमित सेना की मदद के लिए प्रादेशिक सेना (टीए) के अधिकारियों और जवानों को बुला सकते हैं। यह कदम भारत और पाकिस्तान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच आया है। रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग ने छह मई को एक अधिसूचना जारी की जिसमें कहा गया है, यह आदेश 10 फरवरी 2025 से 09 फरवरी 2028 तक तीन वर्षों के लिए लागू रहेगा।
प्रादेशिक सेना की स्थापना नौ अक्टूबर 1949 को हुई थी और पिछले वर्ष इसकी स्थापना के 75 वर्ष पूरे हुए हैं। इस बल ने दशकों की अपनी यात्रा के दौरान युद्ध के समय तथा मानवीय और पर्यावरण संरक्षण कार्यों में राष्ट्र की सेवा की है। यह पूरी तरह से नियमित सेना के साथ एकीकृत है। राष्ट्र निर्माण के प्रयासों और युद्ध या संघर्ष के दौरान किए गए योगदान के सम्मान में, प्रादेशिक सेना में कई व्यक्तियों को वीरता के साथ-साथ विशिष्ट सेवा पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। अधिसूचना में कहा गया, प्रादेशिक सेना नियम 1948 के नियम 33 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्र सरकार, सेना प्रमुख को उस नियम के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रादेशिक सेना के प्रत्एक अधिकारी और प्रत्एक भर्ती व्यक्ति को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने या नियमित सेना को सहायता या अनुपूरण करने के उद्देश्य से शामिल करने के लिए बुलाने का अधिकार देती है। सरकारी अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि, मौजूदा 32 इन्फैंट्री बटालियनों (प्रादेशिक सेना) में से 14 इन्फैंट्री बटालियनों (प्रादेशिक सेना) को दक्षिणी कमान, पूर्वी कमान, पश्चिमी कमान, मध्य कमान, उत्तरी कमान, दक्षिण पश्चिमी कमान, अंडमान और निकोबार कमान तथा सेना प्रशिक्षण कमान (एआरटीआरएसी) के क्षेत्रों में तैनाती के लिए शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि इस कार्यान्वयन का आदेश तभी दिया जाएगा जब बजट में धनराशि उपलब्ध हो या बजट में आंतरिक बचत के पुनर्विनियोजन द्वारा उपलब्ध कराई गई हो। अधिसूचना में कहा गया है, रक्षा मंत्रालय के अलावा अन्य मंत्रालयों के आदेश पर कार्यान्वयन इकाइयों के लिए लागत संबंधित मंत्रालयों के खाते से ली जाएगी तथा उसे रक्षा मंत्रालय के बजट आवंटन में शामिल नहीं किया जाएगा। 
 
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