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उत्तर प्रदेश
राम मंदिर में शुरू हुआ रामलला का झूलनोत्सव, स्वर्ण जड़ित चांदी के झूले पर प्रभु ने दिए दर्शन
By Virat baibhav | Publish Date: 17/8/2026 3:39:17 PM
राम मंदिर में शुरू हुआ रामलला का झूलनोत्सव, स्वर्ण जड़ित चांदी के झूले पर प्रभु ने दिए दर्शन

अयोध्या। सावन के पावन महीने में रामनगरी की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में सोमवार से रामलला का झूलनोत्सव शुरू हो गया। इस अवसर पर उत्सव मूर्ति को स्वर्ण जड़ित चांदी से निर्मित आकर्षक झूले पर विराजमान कराया गया। फूलों से सजे इस झूले पर रामलला के मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।   झूलनोत्सव के दौरान मंदिर परिसर भक्ति और उल्लास से सराबोर नजर आया। गर्भगृह में भगवान के समक्ष भक्तों ने सखी भाव से भक्ति गीत और कजरी प्रस्तुत की। भजन-कीर्तन और पारंपरिक गीतों की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालुओं ने झूले पर विराजमान रामलला के दर्शन किए। धार्मिक परंपरा के अनुसार सावन में भगवान को झूला झुलाने की परंपरा रामनगरी के मठ-मंदिरों में विशेष महत्व रखती है। अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में भगवान श्रीराम, माता सीता और अन्य विग्रहों को झूले पर विराजमान कराकर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भी सावन के दौरान रामलला को प्रतिदिन विशेष वस्त्रों और आभूषणों से सजाकर झूला झुलाने की परंपरा निभाई जा रही है। स्थानीय संतों के अनुसार, रामलला के जन्म से जुड़ी मान्यताओं में भी झूलनोत्सव का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के जन्म के करीब चार महीने बाद माता कौशल्या ने राजा दशरथ की अन्य रानियों के साथ मिलकर रामलला और उनके भाइयों को झूला झुलाया था। इस दौरान सावन के पारंपरिक कजरी गीत गाए जाते थे। कालांतर में यही परंपरा अयोध्या के धार्मिक उत्सवों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। सदस्य के अनुसार राम मंदिर में झूलनोत्सव के लिए गर्भगृह सहित मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। झूले को फूलों से सजाकर आकर्षक स्वरूप दिया गया है। सुबह से ही श्रद्धालु रामलला के झूला दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं। इसी क्रम में नाग पंचमी के अवसर पर अयोध्या के शेषावतार मंदिर में भगवान लक्ष्मण के दर्शन और तस्वीरें भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। धार्मिक मान्यता में भगवान लक्ष्मण को शेषनाग का अवतार माना जाता है। रामनगरी में सावन झूला उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अयोध्या की प्राचीन सांस्कृतिक और भक्ति परंपरा का जीवंत स्वरूप भी है।
 
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