नई दिल्ली। ‘सेवा पखवाड़ा’ के अंतर्गत गुरुवार को दिल्ली के न्यू अशोक नगर स्थित दिल्ली नगर निगम प्राथमिक विद्यालय में एक कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 502 पालना घर सह क्रेच केंद्रों का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया। मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली सरकार पालना को देश के सामने मॉडल के रूप में पेश करेगी। कार्यक्रम में केंद्रीय कॉरपोरेट मामलों एवं सडक़ परिवहन राज्य मंत्री व पूर्वी दिल्ली के सांसद हर्ष मल्होत्रा, विधायक रविकांत, रवि नेगी, दिल्ली सरकार की महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव रश्मि सिंह व गणमान्यजन आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही सभी महत्वपूर्ण योजनाओं की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें बाजरा और पोषण तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। वहां हस्तशिल्प और हथकरघा पर एक खंड प्रदर्शित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल विजन पर जोर दिया गया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किए गए पालना घर आंगनवाड़ी सह क्रेच केंद्रों ने कामकाजी माताओं को बड़ा सहारा दिया है। दिल्ली का क्रेच मॉडल देश के लिए प्रेरणा बनेगा। यहां बच्चों को पौष्टिक आहार, खिलौनों और विविध गतिविधियों के माध्यम से बेहतर देखभाल और सीखने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने विशेष रूप से मिलेट्स से बनी स्थानीय रेसिपियों और पोषण चौपाल की सराहना की और विश्वास जताया कि बच्चों को बेहतर पोषण और सुरक्षित माहौल मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने आंगनवाड़ी और क्रेच कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे बच्चों को अपने स्नेह और जिम्मेदारी के साथ संभालें, क्योंकि माताएं अपने बच्चों को उनके पास विश्वास के साथ छोड़ती हैं।
पालना-आंगनवाड़ी को बच्चों की देखभाल का ‘वन-स्टॉप सेंटर’ बनाएगी दिल्ली सरकार: रेखा गुप्ता
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह 502 केंद्र कामकाजी और मजदूर माताओं को वह सहारा देंगे, जिसकी उन्हें सबसे अधिक आवश्यकता है। यहां उनके बच्चों को पौष्टिक भोजन, देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा मिलेगी, जिससे माताएं निश्ंिचत होकर अपने रोजगार और जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार इस पहल को मॉडल के रूप में पूरे देश के सामने प्रस्तुत करेगी और हर पालना-आंगनवाड़ी को बच्चों की देखभाल का ‘वन-स्टॉप सेंटर’ बनाएगी। उन्होंने विशेष रूप से घोषणा की कि अब से आंगनवाड़ी और क्रेच कार्यकर्ताओं को ‘मौसी’ कहा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसी का अर्थ है मां जैसा प्यार देने वाली। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी बच्चा असुरक्षित न रहे और हर मां अपने रोजगार व जिम्मेदारियों को बिना किसी फिक़्र के निभा सके। मुख्यमंत्री ने महिलाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की घोषणा की और कहा कि सरकार बिना गारंटी 10 करोड़ रुपए तक का एमएसएमई लोन (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम ऋण) महिलाओं को उपलब्ध कराएगी, जिससे वे छोटे और मझोले उद्योग स्थापित कर सकें।
6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए सुरक्षित देखभाल
पालना, हर मां का सहारा, हर बच्चे की सुरक्षा के उद्देश्य से शुरू की इस योजना के तहत दिल्ली में 502 पालना आंगनवाड़ी सह क्रेच केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए सुरक्षित देखभाल, पौष्टिक आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पहल कामकाजी माताओं को निश्चिंत होकर अपने रोजगार और दायित्व निभाने में सहारा और सुकून प्रदान करेगी। दिल्ली सरकार का विश्वास है कि विकसित दिल्ली का सपना तभी साकार होगा जब हमारे बच्चे स्वस्थ और मुस्कुराते हुए बड़े होंगे और हमारी महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी। पालना योजना मिशन शक्ति और मिशन पोषण की ताक़त के साथ हर घर तक विश्वास और सुरक्षा पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगी।